पेट्रोल -डीजल के बाद अब आलू की बारी

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नई दिल्ली। पेट्रोल—डीजल के आसमान छूते दामों से देश की जनता तो बेहाल थी ही अब गरीबों की सबसे लोकप्रिय सब्जी ने भी अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। ऐसा शायद ही कोई शख्स हो जो अपने दैनिक आहार में आलू का प्रयोग न करता हो, अब आलू के भी बढ़ते दामों से लोगों की पेशानी पर बल ला दिए हैं।

फुटकर बाजार में आलू 25 रुपये किलो तक बिक रहा है। इस साल आलू का उत्पादन भी गिरा है वहीं आवक कम होने के कारण दामों में इजाफे की बात कही जा रही है। इसके साथ ही आलू के सबसे बड़े उत्पादक उत्तर प्रदेश और पंजाब में 10 से 15 फीसदी फसल नष्ट हो गई है।

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आलू की बुआई करीब 7 फीसदी तक गिरावट आई है, जिससे 10 से 20 फीसद तक उत्पादन गिरा है। आने वाले दिनों में आलू की कीमत और बढ़ने की संभावना है। आलू की कीमत को लेकर सरकार भी गंभीर है। आलू की जमाखोरी की आशंका के ​चलते सरकार स्टाक लिमिट लगाने का मन बना रही है। इसके लिए कमेटी का भी गठन किया गया है।


ये है मुख्य वजह 

 

इस साल उत्तर प्रदेश में आलू का उत्पादन 20 फीसदी घट गया है है। जिसके चलते आलू की कीमतों में तेजी आई है। पिछले साल, किसानों को आलू का भाव 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा था। अब उन्हें आलू का भाव 13-15 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है। उत्तर प्रदेश, देश में आलू का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। उत्तर प्रदेश में पिछले साल 1.6 करोड़ टन आलू का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 487 रुपये प्रति कुंतल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा की थी। राज्य सरकार ने राज्य के 25 लाख आलू उत्पादकों की मदद के लिए करीब 1 लाख मीट्रिक टन आलू की खरीद भी की थी।

 

 

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