ईरान पर फिर लगे अमेरिकी प्रतिबंध... भारत के लिए मुश्किलें बढ़ी

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व्यवसाय के समाचार/ BUSSINESS NEWS

 

नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर से प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों के साथ ईरान पर वे प्रतिबंध फिर से लागू हो गए हैं जिन्हें साल 2015 में हटा लिया गया था। उल्लेखनीय है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ परमाणु समझौता हुआ था जिसके तहत ईरान से ये प्रतिबंध हटा लिए गए थे। अमेरिका का मानना है कि आर्थिक दबाव के कारण ईरान नए समझौते के लिए तैयार हो जाएगा और अपनी हानिकारक गतिविधियों पर रोक लगा देगा।

चीन के बाद भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है। वहीं, ईरान भी अपने दस प्रतिशत तेल का निर्यात केवल भारत को ही करता है। भारत के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है। एक तरफ जहां ईरान के साथ उसके गहरे संबंध हैं वहीं दूसरी ओर, वह ईरान परणाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने के फैसले से भी सहमत नहीं है।

भारत पर इस समय अमेरिकी दबाव भी बढ़ता जा रहा है। भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए भी निवेश किया है जो भारत-अफगानिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण लिंक है। अमेरिकी प्रतिबंध इस परियोजना के विकास में बाधा डाल सकते हैं।

 

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आखिर क्या है प्रतिबंध-

-ईरान सरकार द्वारा अमेरिकी डॉलर को खरीदने या रखने पर रोक।

-सोने या अन्य कीमती धातुओं में व्यापार पर रोक।

-ग्रेफाइट, एल्यूमीनियम, स्टील, कोयला और औद्योगिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर पर रोक।

-ईरान की मुद्रा रियाल से जुड़े लेन-देन पर रोक।

-ईरान सरकार को ऋण देने से संबंधित गतिविधियों पर रोक।

-ईरान के ऑटोमोटिव सेक्टर पर प्रतिबंध।

-इन सबके अलावा ईरानी कालीन तथा खाद्य पदार्थों का आयात भी बंद कर दिया जाएगा।

अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई भी कंपनी या देश इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करेगा तो उन्हें इसके गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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5 नवंबर से लगाए  जाने वाले प्रतिबंध-

ईरान  के बंदरगाहों का संचालन करने वालों पर प्रतिबंध।

ऊर्जा, शिपिंग और जहाज निर्माण सेक्टर पर प्रतिबंध।

ईरान के पेट्रोलियम संबंधित लेन-देन पर प्रतिबंध।

सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के साथ विदेशी वित्त संस्थानों के लेन-देन पर प्रतिबंध।

 

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प्रतिबंधों का प्रभाव-

दोबारा लगाए गए प्रतिबंध अपरदेशीय (extraterritorial) हैं। ये प्रतिबंध न केवल अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों पर लागू होते हैं, बल्कि गैर-अमेरिकी व्यवसायों या व्यक्तियों पर भी लागू होते हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान से संबंधित व्यापार और निवेश गतिविधि में शामिल उन लोगों को दंडित करना है जिन्हें इन प्रतिबंधों के तहत कोई विशेष छूट प्राप्त नहीं है।

कई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने पहले से ही अपने ईरानी व्यवसाय बंद कर दिए हैं या ऐसा करने की तैयारी कर रहे हैं।

 

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ईरान पर लगे प्रतिबंधों का भारत पर असर-

 

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