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बैड लोन की समस्या से निजात पाने का नया तरीका...

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व्यापार के समाचार/ BUSSINESS NEWS

 

नई दिल्ली। 50,000 करोड़ रुपये से ऊपर के बैड लोन फिलहाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इंडिपेंडेंट क्रेडिट इवोल्यूशन (आईसीई) फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं। एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि बैंकों को किसी भी संकल्प योजना के कार्यान्वयन के लिए आरपी4 रेटिंग रखने के लिए 40 से 60 फीसद कर्मचारियों की छटनी करने की आवश्यकता है।

 

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इंडस्ट्रियल बॉडी एसोचैम और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक इन संपत्तियों के लिए औसत टिकाऊ ऋण लगभग 50 फीसद है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 12 फरवरी के सर्कुलर के मुताबिक वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करने के संबंध में में आरपी-4 रेटिंग के साथ सभी संकल्प योजनाओं को मध्यम स्तर की सुरक्षा माना जाता है। आरबीआई ने अपने संशोधित फ्रेमवर्क में कहा था कि सभी संकल्प योजनाओं में उन बड़े खातों के लिए पुनर्गठन या स्वामित्व में परिवर्तन शामिल है जो कि जहां उधारदाताओं का कुल एक्सपोजर 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक के लिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (सीआरए) की ओर से अवशिष्ट ऋण के लिए आईसीई की आवश्यकता होगी।

 

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आरबीआई के मुताबिक सभी तनावग्रस्त खातों जो कि 500 करोड़ रुपये या फिर उससे ऊपर के हैं के लिए ऐसे दो आईसीई की आवश्यकता होगी, जबकि अन्य को एक आईसीई की आवश्यकता होगी। केवल ऐसी संकल्प योजनाएं जो आरपी-4 की क्रेडिट राय प्राप्त कर चुकी हैं, या फिर ऐसी जो कि एक या दो सीआरए से अवशिष्ट ऋण के लिए काफी हैं के कार्यान्वयन के लिए विचार किया जाएगा।

 

 

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