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भारत में बढ़ने लगे हैं करोड़पति !

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नई दिल्ली। आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं की संख्या में पिछले चार वर्ष में 80 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई है। एक करोड़ से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या में चार साल में 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने बताया है कि पिछले तीन साल में प्रत्यक्ष कर और सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में लगातार वृद्धि हुई है। इस दौरान व्यक्तिगत करदाताओं द्वारा चुकाये गये औसत कर में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। इस अवधि में वेतनभोगी करदाताओं की औसत आय में 19 प्रतिशत वृद्धि हुई।

आयकर विभाग के नीति बनाने वाले निकाय सीबीडीटी ने पिछले चार साल के महत्वपूर्ण आयकर और प्रत्यक्ष करों से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014-15 में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आय दिखाने वाले व्यक्तिगत आयकरदाताओं की संख्या 48,416 थी। यह 2017-18 तक 68 प्रतिशत बढ़कर 81,344 पर पहुंच गई।

इस तरह सीबीडीटी के मुताबिक, 'एक करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले कुल करोड़पति करदाताओं (कंपनियों, फर्में, हिंदू अविभाजित परिवार और व्यक्तिगत करदाता) की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।' इस दौरान उनकी संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल करदाताओं की संख्या (कॉरपोरेट, फर्में, हिंदू अविभाजित परिवार और अन्य) की संख्या में तीन साल में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।

सीबीडीटी ने कहा कि आकलन वर्ष 2014-15 में एक करोड़ रुपये से अधिक की आय का खुलासा करने वाले करदाताओं की संख्या 88,649 थी। वहीं 2017-18 में यह बढ़कर 1,40,139 हो गई। यह 60 प्रतिशत की वृद्धि है।

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ जयंतो राय चौधरी ने इस बारे में यह राय व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि इसका मायने दो चीज हैं एक तो चार साल में जीडीपी में बदलाव आने के कारण कुछ-कुछ इनकम टैक्‍स की रिटर्न भी फाइल हुई हैं। दूसरी नोटबंदी के कारण से भी काफी रिटर्न्स ज्‍यादा शायद फाइल हुई होंगी।

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