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भारत में आने वाले रेमिटांसिस का RBI ने किया सर्वेक्षण

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व्यापार के समाचार/ BUSSINESS NEWS

संयुक्त अरब अमीरात बना शीर्ष स्त्रोत  

 

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए किए गए आवक प्रेषक (inward remittances) सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आवक प्रेषक के शीर्ष श्रोत के रूप में उभरा है, जबकि विदेशों से भेजे गए धन का सार्वजनिक हिस्सा केरल को प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि इस तरह का पिछला सर्वेक्षण रिजर्व बैंक द्वारा दिसंबर 2013 में प्रकाशित किया गया था। बता दें कि आवक प्रेषण शब्द यह इंगित करता है कि धन को घरेलू या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी खाते में स्थानांतरित कर दिया गया है।

 

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रिजर्व बैंक द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, कुल प्रेषण में संयुक्त अरब अमीरात का हिस्सा 26.9 प्रतिशत है, इसके बाद संयुक्त राज्य 22.9 प्रतिशत, सऊदी अरब 11.6 प्रतिशत, कतर 6.5 प्रतिशत और कुवैत 5.5 प्रतिशत का स्थान आता है। भारत द्वारा प्राप्त कुल प्रेषण का 82 प्रतिशत हिस्सा आठ देशों- संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान, यूनाइटेड किंगडम और मलेशिया से आया।

 

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इस सर्वेक्षण के अनुसार, प्रेषण का सबसे लोकप्रिय माध्यम आहरण व्यवस्था (Rupee Drawing Arrangment-RDA) है जो कुल प्रेषण का 75.2 प्रतिशत है, इसके बाद स्विफ्ट 19.5 प्रतिशत, प्रत्यक्ष हस्तांतरण 3.4 प्रतिशत और चेक एवं ड्राफ्ट 1.9 प्रतिशत है। कुल प्रेषण का अधिकांश हिस्सा 74.1 प्रतिशत निजी बैंकों ने प्राप्त किया, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 17.3 प्रतिशत तथा शेष विदेशी बैंकों ने प्राप्त किया। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, सभी रिपोर्ट किए गए हस्तांतरण का 70.3 प्रतिशत, 500 डॉलर से अधिक था और केवल 2.7 प्रतिशत हिस्सा 200 डॉलर से कम था।

 

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विदेशों से धन प्राप्त करने वाले राज्यों में केरल 19 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद महाराष्ट्र 16.7 प्रतिशत, कर्नाटक 15 प्रतिशत, तमिलनाडु 8 प्रतिशत और दिल्ली 5.9 प्रतिशत है। केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु को कुल प्रेषण का 58.7 प्रतिशत प्राप्त हुआ। दिल्ली 5.9 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश 4 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश 3.1 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल 2.7 प्रतिशत, गुजरात 2.1 प्रतिशत और पंजाब 1.7 प्रतिशत शीर्ष 10 राज्यों में से थे जिन्हें आवक प्रेषण प्राप्त हुआ। सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय निवासियों द्वारा प्राप्त प्रेषण के आधे से अधिक का उपयोग परिवार के रखरखाव अर्थात उपभोग 59.2 प्रतिशत, बैंकों में जमा 20 प्रतिशत और भूमिगत संपत्ति तथा शेयरों में निवेश 8.3 प्रतिशत के लिए किया गया।

 

 

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