31 जुलाई तक नहीं भरा इनकमटैक्स तो होगा जुर्माना

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जानिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां

 

नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2018 है। अगर 31 जुलाई तक इनकमटैक्स नहीं भरा तो जुर्माना भरना होगा। ऐसे में सुनिश्चित करें कि आपकी ओर से फाइल की गई रिटर्न ठीक है। कई बार करदाता जल्दबाजी में कुछ गलतियां कर देते हैं जिस कारण उनकी कर देनदारी तो प्रभावित होती है साथ ही आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स ने आईटीआर फार्म की संख्या 9 से घटाकर 7 कर दी है। रिटर्न भरते समय अब सभी टैक्सपेयर्स को अपना 12 अंकों का आधार नंबर और 28 अंकों का आधार एनरॉलमेंट नंबर भी भरना जरूरी है।

 

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कुछ करदाता नाबालिग बच्चे के नाम से निवेश करते हैं जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट, बॉन्ड्स आदि। इस तरह के निवेश पर हर साल ब्याज मिलता है। लोगों को लगता है कि यह तो नाबालिग बच्चों का है, यह सोचकर ही वो आईटीआर में इसका उल्लेख नहीं करते हैं। जबकि इनकम टैक्स कानून के तहत इनका विवरण देना जरूरी होता है।

यदि आपने अपनी मेहनत की कमाई कैंसर, किडनी फेल या ऐड्स जैसी गंभीर बीमारी के इलाज पर खर्च की हो तो आपको उस पर टैक्स में राहत मिलेगी। जल्दबाजी में आईटीआर दाखिल करते समय लोग छूट के दायरे में आने वाली चीजों के बारे में बताना भूल जाते हैं। ये आय लाभांश, इक्विटी पर हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन, प्रोविडेंट फंड पर मिला ब्याज आदि होती हैं। आयकर विभाग विशेष रूप से इस तरह की आय के विवरण की मांग करता है। यदि कोई टैक्सपेयर 40 फीसदी तक दिव्यांग है और मेडिकल अथॉरिटी की ओर से सर्टिफाइड है तो वह सेक्शन 80U के तहत 75 हजार रुपए तक क्लेम कर सकते हैं।

 

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कई करदाता इस बात से वाकिफ नहीं होते कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स सेविंग की जा सकती है। यह धारा 80D के तहत होती है। लोग कई बार टैक्स सेविंग डिडक्शन्स क्लेम करना भूल जाते हैं। वो सेक्शन 80टीटीओ के तहत सेविंग बैंक एकाउंट पर ब्याज, सेक्शन 80सी के तहत ट्यूशन फीस पर क्लेम करने से चूक जाते हैं।

 

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फॉर्म 26एएस में टीडीएस जानकारियों में गलती करने से बचना चाहिए। गलती के चलते अतिरिक्त कर देनदारी बन जाती है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले अपना फॉर्म 26 एएस जरूर चेक कर लें। इससे आप आगे होने वाली दिक्कतों से बच सकते हैं। होम लोन लेने वाले लोगों को यह जानकारी बहुत कम लोगों को होती है कि इस लोन के लिए चुकाई जाने वाली प्रॉसेसिंग फीस को भी सेक्शन 24 के तहत क्लेम किया जा सकता है। सेविंग अकाउंट में जमा बैलेंस पर हर तिमाही में सेक्शन 80TTA के तहत 10 हजार रुपए तक के ब्याज पर आपको आयकर में छूट मिलती है।

 

 

 

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