ट्राई ने दी 5G स्पेक्ट्रम की बिक्री को मंजूरी

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नई दिल्ली। हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश में पहली बार 5G सेवाओं की पेशकश के लिए लगभग 492 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्ट्ज के एक अखिल भारतीय आरक्षित मूल्य पर स्पेक्ट्रम की नीलामी की सिफारिश की। अपनी सिफारिशों में ट्राई ने उच्च गति सेवाओं के लिए लोकप्रिय 700 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम की आरक्षित कीमतों में भी 43 प्रतिशत से अधिक कटौती की मांग की है। 2016 की नीलामी में उच्च मूल्य निर्धारण के कारण इसे कोई खरीददार नहीं मिला। 700 मेगाहर्ट्ज के लिए अनुशंसित अखिल भारतीय आरक्षित मूल्य पिछली बार के 11,500 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्ट्ज की तुलना में इस बार 6,538 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्ट्ज हैं।

 

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आगामी बिक्री में सभी उपलब्ध स्पेक्ट्रम को निलामी में रखे जाने की अनुशंसा करते हुए ट्राई ने सुझाव दिया कि नीलामी में देरी या स्पेक्ट्रम को वापस रखने में कोई समझदारी नहीं है। सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई इन सिफारिशों के आधार पर नीलामी के अगले चरण के लिए मूल्य और समय को अंतिम रूप दिया जाएगा। स्पेक्ट्रम के लिए आखिरी नीलामी अक्टूबर 2016 में हुई थी, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बिना बिके रह गए थे, सरकार ने इस नीलामी से 65 हजार करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की थी।

 

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वर्ष 2016 से दूरसंचार उद्योग में मजबूत समेकन देखा गया है, केवल तीन मुख्य प्रतिस्पद्धी- भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो ही मैदान में बचे हैं। बता दें कि व्यापक रूप से ध्वनि सेवाएं प्रदान करने हेतु किए जाने वाले 1800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए 3,285 करोड़ रुपए के आरक्षित मूल्य की सिफारिश की गई है। 800 मेगाहर्ट्ज बैंड, 900 मेगाहर्ट्ज बैंड, 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम के लिए आरक्षित मूल्य क्रमश: 4651 करोड़ रुपए, 1622 करोड़ रुपए, 3399 करोड़ रुपए, 960 करोड़ रुपए और 821 करोड़ रुपए रखा गया है। 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज और 3300-3600 मेगाहर्ट्ज की कीमतें अनपेक्षित स्पेक्ट्रम के लिए हैं।

 

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आपको बताते चलें कि ट्राई ने यह भी बताया कि वाणिज्यिक और विभिन्न पीएसयू तथा सरकारी संगठनों को आवंटित स्पेक्ट्रम सहित सभी आवंटित स्पेक्ट्रम के लेखा परीक्षा की तत्काल आवश्यकता है। यह कार्य नियमित आधार पर एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए। 5G वायु तरंगों यानी 3300-3600 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए, ट्राई ने कहा कि इसे 20 मेगाहर्ट्ज के ब्लॉक आकार में नीलामी में रखा जाना चाहिए। इस बैंड के एकाधिकार से बचने के लिए प्रति बोलीदाता 100 मेगाहर्ट्ज की सीमा होनी चाहिए। ट्राई ने कहा कि दुरुपयोग से बचने के लिए 2 साल के विपरीत 5 साल की लॉक-इन अवधि के बाद इस बैंड में स्पेक्ट्रम व्यापार की अनुमति दी जानी चाहिए।

 

 

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