'वैश्विक विकास का नेतृत्व करेगी भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था'

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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, निवेश में वृद्धि और मजबूत निजी खपत के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर के वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत होने का अनुमान है साथ ही यह भी कहा गया है कि राजकोषीय समेकन की गति में तेजी लाने के लिए भारत को बेहतर आर्थिक स्थितियों का उपयोग करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय मुद्र कोष ने अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 7.3 फीसद और अगले वित्त वर्ष में विकास की दर 7.5 फीसद के अपने अनुमान को बरकरार रखा है।

 

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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) को भारत की कर प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार की संज्ञा दी है। IMF ने यह सलाह भी दी है कि GST के ढांचे को और अधिक सरल बना कर इसमें कर की केवल दो दरों को शामिल करना अधिक लाभदायक होगा। एक मानक दर जिसका स्तर कम हो, दूसरी दर चुनिंदा वस्तुओं के लिए हो और जो उच्च हो। उल्लेखनीय है कि GST में इस समय चार दरें लागू हैं। इससे GST प्रणाली का विकास होगा तथा राजस्व निरपेक्षता भी बनी रहेगी।

 

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IMF के अनुसार, भारत में NPA की स्थिति काफी चिंताजनक है। NPA की समस्या को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों जैसे- दिवालियापन कानून तथा भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देश आदि को सराहनीय कदम बताया गया है। सरकारी बैंकों के प्रशासन की हालत को देखते हुए IMF ने इन बैंकों के निजीकरण की सलाह दी है। हाल ही में भारत के सार्वजनिक बैंकों में हुई धोखाधड़ी को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने यह सलाह दी है।

 

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IMF ने भारत के श्रम बाजार पर ध्यान देते हुए कहा है कि देश में तेजी से बढ़ते युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पुराने श्रम कानूनों में बदलाव करना आवश्यक है। श्रम सुधारों के साथ ही भूमि सुधार भी आवश्यक है क्योंकि इसके बिना अनौपचारिक व संगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत करना संभव नहीं है। वैश्विक बाजारों के साथ अपने एकीकरण में सुधार से भारत लाभ उठा सकता है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह को बनाए रखने और व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए और अधिक प्रयास किए जा सकते हैं जो कि देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। जैसे व्यापार दस्तावेज संबंधी आवश्यकताओं और प्रक्रियाओं को कम करना, टैरिफ कम करना, व्यापार वातावरण में सुधार को जारी रखना और शासन में सुधार।

 

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बता दें कि आईएमएफ एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था है जो अपने सदस्य देशों की वैश्विक आर्थिक स्थिति पर नजर रखने का कार्य करती है। यह अपने सदस्य देशों को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय विनिमय दरों को स्थिर रखने तथा आर्थिक विकास को सुगम बनाने में भी सहायता प्रदान करती है। आईएमएफ का मुख्यालय वाशिंगटन डी.सी. संयुक्त राज्य अमेरिका में है। आईएमएफ की विशेष मुद्रा एसडीआर (Special drawing rights) कहलाती है। आईएमएफ का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना, गरीबी को कम करना, रोजगार के नए अवसरों का सृजन करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाना है।  

 

 

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