GRP पुलिस है या कुकर्मियों का गिरोह, पत्रकार के साथ हैवानियत की सभी हदों को किया पार

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अपराध के समाचार/Crime news

लखनऊ। वर्दी और पुलिस का बिल्ला लगते ही युवक अपनी पुरानी हैसियतों को भूलकर किस तरह हैवानियत और दरिंदगी में उतर आता है, इसका जीता जागता उदाहरण जीआरपी पुलिस ने पेश कर दिया है। वैसे तो पुलिस कोई भी हो उनकी जिम्मेदारी आम नागरिकों की सुरक्षा और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना है। इसके लिए शपथ ग्रहण कर कस्में भी खाई जाती है। लेकिन वर्दी का पावर मिलते ही ये खाकीधारी रूह को कंपा देने वाली हैवानियत को अंजाम देने से भी बाज नहीं आते। हैरान करने वाली बात है कि पुलिस का अपराध कितना भी घिनौना क्यों न हो उच्च अधिकारी बहुत अधिक कार्रवाई ​करने पर भी आए तो लाइन हाजिर, निलंबित या फिर ट्रांसफर कर देते हैं। अपराधियों से भी घिनौना व्यववहार करने वाले इन पुलिसकर्मियों या अधिकारियों की न तो बर्खास्तगी होती है और न ही एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी। इस वजह से खाकी तानाशाह बनती जा रही है। एक पत्रकार को साथ दरिंदगी की सारी हदों को पार कर जीआरपी पुलिस ने ऐसी ही मिशाल पेश की है। 

खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के शामली जिले में कवरेज करने गए एक पत्रकार को पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद जीआरपी इस कदर हैवान बनी कि पत्रकार के कपड़े उतार दिए और मारपीट की। यही नहीं पत्रकार के ऊपर पेशाब भी किया। बताया जा रहा कि वारदात गत मंगलवार को शामली में घटी। पुलिस ने इतनी नीचता और कुकर्मी भरी हकरत को इसलिए अंजाम दिया कि पत्रकार ट्रेन के बेपटरी होने पर कवरेज करने पहुंचा था। बस इसी बात से खाकीधारी सबकुछ भूल गए और हैवानियत की वारदात को अंजाम दे डला। हैरान करने वाली बात है कि अभिव्यक्ति की आजदी को कोई और नहीं कानून के रखवाले ही कुचल रहे हैं। यदि पत्रकार ने किसी भी पुलिस को थप्पड़ मारी होती या फिर यहां तक कि गालियां बकी होती तो उसके ऊपर कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया होता। यही नहीं जेल के अंदर भी पुलिस अपनी घिनौनी करतूतों को अंजाम देती। लेकिन पुलिस कुछ भी करे उसके लिए न तो कोई नियम है और न ही कानून। हैरान करने वाली बात है कि कानून के रखवाले ही संविधान के नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। 

जीआरपी पुलिस की इस पूरी घटना की करतूत का वीडियो पत्रकारों ने कैद कर लिया। पीड़ित पत्रकार अमित शर्मा का आरोप है कि जीआरपी पुलिस के जवानों ने उसके कपड़े उतार दिए। इसके बाद मारपीट की। जब इससे जी नहीं भरा तो मुंह में पेशाब किया। एसएचओ राकेश कुमार के साथ जीआरपी पुलिस दल स्टेशन पर पहुंचा था और पत्रकार के साथ ये हैवानियत भरी करतूत कर डाली। पत्रकार पुलिस को अपने बारे में बताता रहा लेकिन पुलिस की दरिंदगी नहीं रुकी। मानो स​बकुछ पुलिस ने प्लान बनाकर किया है। एक एजेंसी के मुताबिक अमित धिमनपुरा के पास मालगाड़ी के बेपटरी होने पर पहुंचे थे और कवरेज कर रहे थे। पुलिसकर्मी यहां सादे कपड़े में आए और कैमरा छीनकर फेंक दिया। इसके बाद मारपीट पर उतर आए। यही नहीं पत्रकार को पकड़कर लॉकअप में बंद कर दिया। यहां कपड़े उतारकर मारपीट करते हुए हैवानियत की गई। 

जीआरपी की काली करतूत का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सरकार से सभी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। दरअसल, पत्रकार पहले भी पुलिसकर्मियों के काले कारनामों की पोल खोल चुका है। इस वजह से वर्दीधारी पत्रकार से खुन्नस खाए हुए थे। भ्रष्टाचार का आलम जीआरपी में किस तरह से है, यह बात भी कहीं से छिपी नहीं है। लेकिन वर्दी पहनने के बाद क्या नियम और क्या कानून। उच्च अधिकारी तो जांच का खेल खेलने और निलंबित कर पल्ला झाड़ने के लिए हैं। बड़ा सवाल ये है कि क्यों नहीं ऐसे मामलों में कानून को हाथ में लेने के बाद भी पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई नहीं होती? एक पत्रकार को सीएम पर टिप्पणी करने के लिए मात्र पुलिस लखनऊ से दिल्ली जाकर गिरफ्तार कर लेती है। वह भी खुद ही उपनिरिक्षक शिकायतकर्ता बनकर रिपोर्ट दर्ज कराते हैं। 

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