माफियाओं के कब्जे में शामली का वन विभाग

Foto

अपराध के समाचार

 

हजारों हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर माफियाओं ने उगाई फसलें

 

इकराम अली

लखनऊ। प्राकृतिक आपदाओं को टालने के लिए सबसे जरूरी है पर्यावरण संरक्षण। जिसके लिए बडी संख्या में पौधारोपण करने की जरूरत हैं। सरकार पौधारोपण के लिए बजट भी जारी करती है, लेकिन पौधारोपण आखिर होगा कहा? जनपद शामली में वन विभाग की हजारों हेक्टेयर जमीन है, जिसमें से 80 प्रतिशत भूमि पर माफियाओं का कब्जा हैं। जिस पर विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से कब्जा कर माफियाओं ने फसलें उगा रखी है। उस सोने पर सुहागा है यहा तैनात अधिकारी। जिले के झिंझाना वन क्षेत्र में माफियाओं की नजर से बची जमीन पर चार महीने पहले पौधारोपण के लिए लाखों गड्डें कराये गए थे, लेकिन आज तक भी उनमें पौधारोपण नही किया जा सका।

 

यह भी पढ़ें : मोबाइल लिफ्टर बना ऑटो चालक

 

ज्नपद शामली के गांव बानीपुर, शिवनगर, बीबीपुर हटिया, रोटन, मसूरा, तिसंग, ख्वाजपुरा, बरनावी, अकबरपुर सुन्हेटी, पटेड, बल्हेडा, मलकपुर, बसेडा और मंगलपुर में वन विभाग की हजारों हेक्टेयर जमीन है, लेकिन मौके पर देखकर कोई भी व्यक्ति इस जमीन को सरकारी नही बता सकता। क्योंकि इस जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा है और यहां ईख व धान की फसले लहलहा रही हैं। पर्यावण संरक्षण के लिए सरकार वन क्षेत्र में पौधारोपण के लिए करोडों का बजट जारी करती है, लेकिन वन क्षेत्र पर कब्जा होने के कारण सरकार की योजना परवान नही चढ पाती। वन क्षेत्र पर हुए अवैध कब्जों के लिए माफियाओं के साथ विभाग के अधिकारी भी बराबर के हिस्सेदार हैं। ग्रमीणों के मुताबिक जमीन के बदले वन विभाग के अधिकारी माफियाओं से पैसा वसूलते हैं। ग्रामीण जिले में तैनात अधिकारियों से लेकर शासन तक शिकायत करते है, लेकिन परिणाम हमेशा  शून्य ही होता हैं।

 

यह भी पढ़ें : खुलासे के डर से रेप आरोपी ने फांसी लगाकर दे दी जान

 

ताजा मामले में गांव अकबरपुर सुन्हेटी निवासी अफजाल ने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर माफियाओं से वन विभाग की जमीन खाली कराने की मांग की है। करीब दो साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी पीके पांडेय ने एक पूर्व विधायक समेत दर्जनों माफियाओं द्वारा उगायी गई फसलों को नष्ट कर जमीनों को कब्जामुक्त कराया गया था, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। पीके पान्डेय का तबादला होते ही माफियाओं ने फिर से वन विभाग की जमीनों पर कब्जा कर लिया। करीब एक महीना पहले स्वतंत्रता दिवस पर जिला प्रशासन द्वारा शासन को रिकार्ड पौधारोपण की रिपोर्ट भेजी गई थी। जबकि वास्तविकता इससे परे है। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों में घूल झोंककर वन विभाग ने पौधारोपण के लिए गड्डे तो करा दिए, लेकिन पौधारोपण आज तक नही हो पाया।

 

 

leave a reply

क्राइम-अपराध 

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी