पुलिस अफसरों को नहीं हो रहा विश्वास, जांबाज अफसर ने की ख़ुदकुशी

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क्राइम न्यूज़ /अपराध समाचार/crime news

 

लखनऊ।उत्तर प्रदेश पुलिस के तेज तर्रार और जाबाज अफसर राजेश साहनी की मौत ने पूरे पुलिस महकमे को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।पुलिस महकमे से लेकर जनता तक किसी को भी इस बात पर विश्वास  नहीं हो रहा है कि राजेश साहनी जैसे ईमानदार और लोकप्रिय अफसर खुदकुशी कर सकते हैं। जिस पुलिस अधिकारी ने बब्बर खालसा और सैफुल्ला जैसे आतंकियों को धूल चटा दी थी।आखिर उस अफसर के साथ ऐसा क्या हुआ की उन्होंने खुद को गोली मार ली।पुलिस प्रशासन के लिए यह बहुत बड़ा सवाल बना हुआ है।


उत्तर प्रदेश पुलिस के बेहद काबिल अफसरों में शामिल थे। उन्होंने बीते सप्ताह ही पिथौरागढ़ से आईएसआई एजेंट रमेश सिंह को गिरफ्तार करने में उन्होंने अहम भूमिका अदा की थी। एटीएस में आने के बाद आतंकी सैफुल्ला से मुठभेड़ के अलावा साल बब्बर खालसा के आतंकी जसवंत सिंह को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। राजेश साहनी को करीब से जानने वाले बताते हैं कि वह व्यक्तिगत जीवन में जितने सौम्य थे, अपराधियों के लिए उतने ही कड़े मिजाज के थे।उनकी कहानियां आज यूपी पुलिस की गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

साल 2006 में शाम का समय था।उक्त समय तत्कालीन सीओ चौक रहे राजेश सहानी कैसरबाग चौराहे पर वाहन चेकिंग कर रहे थे उसी समय गोलागंज की तरफ से एक बुलेरों काफी तेज गति से आती हुई दिखी जिसे देख्र सहानी ने पुलिसकर्मियों को उसे रोकने का ईशारा किया जब गाड़ी चालक ने पुलिसकर्मियों के ऊपर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की तो सहानी खुद आगे आ गये और दबंगों ने उन पर भी गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया तो वे गाड़ी का बोनट पकड़कर लटक गये और गाड़ी सवार उन्हे उसी हालत में लेकर गाड़ी भगाने लगे और गाड़ी सीधे एसएसपी आवास ले जाकर रोकी तब वहां पर पु​लिस ने दबंगों को गिरफ्तार कर सहानी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा। ऐसा जज्बा रखने वाला मौत के आगे भी तन कर खड़ा होने वाला पुलिस अधिकारी भला कैसे खुद को गोली मार सकता है। 

पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाई और सत्ताधारी पार्टी का करीब बताने वाले पांचों आरोपियों पृथ्वी राज, नरायन राज, उदय प्रताप, हर्ष, राज्यवर्धन को कम समय में 10-10 साल की सजा दिलाने में कामयाबी हासिल की थी सत्ताधारी पार्टी के रसूख की परवाह किए बिना कानून की हिफाजत राजेश साहनी जैसा ही अफसर ही कर सकता था।

आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि राजेश साहनी ने अपने ड्राइवर से सर्विस पिस्टल मंगाई थी।वह अपने साथ पिस्टल लेकर नहीं चलते थे लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे साथ लेकर जाते थे। उन्होंने ड्राइवर से बोला कि वह किसी ऑपरेशन में जा रहे हैं।उनको पिस्टल देने के बाद ड्राइवर उनके कमरे से बाहर चला गया था।कुछ देर बाद वह कमरे में दिखाई नहीं दिए। ड्राइवर ने उनकी तलाश शुरू कर दी। कुछ अन्य पुलिस अफसरों के साथ उनके पुराने कमरे में पहुंचे, तो सभी आवाक रह गए। राजेश साहनी कुर्सी के पास फर्श पर खून से लथपथ पड़े थे।उनके दाहिने हाथ में पिस्टल थी।गोली दाहिनी कनपटी से घुसकर बाईं कनपटी से पार निकल गई थी। मौत से पहले उन्होंने अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी और सामान्य थे। 

एडीजी कानून-व्यवस्था आनन्द कुमार का कहना है, 'यह दुखद है कि एक होनहार और जांबाज पुलिस अधिकारी ने आत्महत्या कर ली है।लखनऊ पुलिस इसकी गहनता से जांच कर रही है।उन्होंने ड्राइवर से पिस्टल मंगाकर कार्यालय में ही खुद को गोली मार ली आत्महत्या का कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। 

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