सोनम हत्याकांड: हत्या को खुदकुशी बताने वाले तीन डॉक्टरों को 3-3 साल की जेल

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7 साल पहले डॉक्टरों ने दी थी गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

 

लखीमपुर-खीरी लखीमपुर की सीजेएम कोर्ट ने शुक्रवार को सोनम हत्याकांड में गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने के आरोपी तीनों डॉक्टरों-ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ एस.पी. सिंह, सर्जन डॉ ए.के. अग्रवाल और डॉ ए.के. शर्मा को दोषी करार दिया है। बता दें सात साल पहले डॉक्टरों ने निघासन थाने में सोनम हत्याकांड की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दी थी। हत्या को आत्महत्या लिखने वाले तीनों डॉक्टरों को कोर्ट ने तीन-तीन साल की जेल की सजा सुनाई है। तीनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

 

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बता दें, जून 2011 में निघासन निवासी तरन्नुम व इंतजाम की बेटी सोनम का शव निघासन थाने में पेड़ की सूखी टहनी से लटका मिला था।  डॉ एस.पी. सिंह, डॉ ए.के. अग्रवाल और डॉ ए.के. शर्मा की टीम ने पोस्टमॉर्टम के बाद रिपोर्ट में लिखा था कि यह आत्महत्या है, लेकिन सोनम की मां तरन्नुम ने इस रिपोर्ट को गलत करार दिया था। मामले में सीओ के गनर अतीक अहमद, विनय कुमार सिंह, शिव कुमार सिंह, राम चन्द्र समेत पांच पुलिसकर्मियों पर रेप के बाद हत्या का आरोप लगाया था।

 

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दोबारा हुए पोस्टमॉर्टम में रेप की पुष्टि नहीं हुई लेकिन यह पाया गया कि सोनम की हत्या गला दबाने से हुई थी। इसके बाद गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने के आरोपी तीनों डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले में सीजेएम कोर्ट में धारा 218 (गलत रिपोर्ट देना) का केस (1348/12) चल रहा था।

 

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कोर्ट ने सभी आरोपियों को शुक्रवार को तीनों डॉक्टरों पर आरोप साबित होने की बात कहते हुए सजा सुना दी। बाद में तीनों को 20-20 हजार रुपये का मुचलका भरवाकर जमानत दे दी गई। हालांकि सजा पर स्टे करते हुए तीनों को सत्र न्यायालय में अपील के लिए एक महीने का समय दिया गया है।

कब्र से शव निकालवा कर हुआ था दोबारा पोस्टमॉर्टम

मामले के तूल पकड़ने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जांच के लिए लखनऊ मंडल के आयुक्त और आईजी जोन को लखीमपुर भेजा। जांच के दौरान थाने के एक कमरे में खून के निशान पाए गए। जिस पर माना गया कि इसी कमरे में सोनम की हत्या हुई।

इसके बाद सीएम के निर्देश पर लखनऊ से पांच डॉक्टरों को भेजा गया और कब्र से शव निकलवाकर दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाया गया। दूसरे पोस्टमार्टम में रेप की पुष्टि नहीं हुई लेकिन गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हो गई थी। जिसके बाद सरकार ने परिजनों की मांग पर इस मामले की जांच को सीबीआई को सौंप दी थी।

 

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