... तो क्या यही है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का सच?

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अपराध के समाचार

 

लखनऊ। 21वीं सदी में मार्डन कपड़े पहन लेने से कोई मार्डन नही हो जाता है। राज्य सरकार हो या केंद्र दोनों ही सरकारें दहेज के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए है। जहां एक तरफ सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। वही दूसरी ओर बहू बेटीओं के खिलाफ बढ़ रही आपराधिक धटनायें थमने का नाम नही ले रही है।

 

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मामला गाजियाबाद के बिशरख थाने के पंचशील कालोनी गौतमबुद्धनगर का है। जहां दहेज लोभियों ने विवाहिता को इतना प्रताड़ित किया  कि वह फांसी लगाने को मजबूर हो गई, और जब फांसी के फंदे पर लटक गई तो दहेज लो​भियों ने उसे  सर्वोदय हास्पिटल कविनगर ग़ाजियाबाद मे भर्ती कराया और उसे मरा समझकर वहां से फरार हो गए। छोडकर फरार हो गये। वह तो ऊपर वाले का शुक्र है कि लड़की की जान बच गई है। वह कहते है न जाको राखे साईयां मार सके न कोई।

 

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फिलहाल लड़की की हालात नाजुक बनी हुई है और उसे वेन्टीलेटर पर डाक्टरों की निगरानी में रखा गया है। इस मामले में जब लड़की के परिवार वालो ने एसएसपी गौतमबुद्ध का घेराव किया तो वहां से सिर्फ आश्वासन मिला न्याय नही। सवाल बड़ा है कि आखिर ऐसी अपराधिक मानसिकता रखने वालो के खिलाफ पुलिस प्रशासन का रवैया इतना ढीला क्यों है।

 

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