यूपी की जेलों में सुरक्षित नहीं कैदी, अब तक 3132 कैदियों की मौत

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लखनऊ। यूपी में कानून व्यवस्था सदैव ही विवादों से घिरी रहती है और उसकी लचरता दिनों दिन बढ़ती जा रही है।प्रदेश की जेलों  में सजा पा चुके कैदियों की मौत को लेकर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।एक आरटीआई का जवाब देते हुए राज्य सरकार ने कहा कि पिछले आठ सालों में राज्य की 63 जिला कारागार, 5 केंद्रीय और तीन विशेष जेलों में 3132 कैदियों की मौत हुई है।

 

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बता दें कि 8 वर्षों में 98 कैदियों ने आत्महत्या की है। जेल में कैदियों की मौत के मामले में बरेली जिला सबसे आगे है। जेल में मरने वालों लोगों में सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदी शामिल हैं। सरकार की ओर से दिया गया आंकड़ा साल 2010 से 2018 के बीच हुई घटनाओं पर आधारित है। 

भदोही जिले के आरटीआई कार्यकर्ता राजमणि पांडेय की तरफ से मुख्यमंत्री कार्यालय से आरटीआई के तहत यह जानकारी मांगी गयी थी। जिसके जवाब में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, लखनऊ की तरफ से दी गयी जानकारी में बताया गया है कि आठ सालों में प्रदेश की जेलों में कुल 3032 कैदियों की मौत हुई है। जवाब के मुताबिक़ इस अवधि में बरेली जिले में सर्वाधिक 201 कैदियों की मौत हुई है, जबकि जिला कारागार ललितपुर और सोनभद्र में सबसे कम 2 कैदियों की मौत हुई है। 

 

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यह कहते है आकड़े 

बीते आठ सालों में कैदियों की सबसे ज्यादा मौत साल 2016 में हुई है। 2016 के आंकड़ों की बात करें तो इस साल प्रदेश भर में कुल 409 कैदियों की मौत हुई है। इसके अलावा 20 कैदियों के आत्महत्या करने की भी बात सामने आई है। वहीं 2017 में कुल 400 कैदियों की जेल में रहने के दौरान मौत हुई, जबकि सिर्फ 5 कैदियों ने कारावास के दौरान आत्महत्या की। सरकार ने जो जानकारी दी है उसमें दिए आंकड़ों ने प्रदेश की जेलों की सुरक्षा पर एक सवाल खड़ा किया है। बता दें कि यह रिपोर्ट उस वक्त सामने आई है, जबकि कुछ दिन पहले ही बागपत की जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

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