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मिसाल : 96 वर्षीया अम्मा ने हासिल किये 100 में से 98 अंक

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Education News / शिक्षा समाचार

"सीखने की कोई उम्र नहीं होती"

नई दिल्ली। मनुष्य के सीखने की, पढ़ने-लिखने की, विद्या-अध्ययन की कोई उम्र नहीं होती है। इसकी ताजा मिसाल 96 वर्षीय कर्थियानी अम्मा हैं। केरल की 96 वर्षीय कर्थियानी अम्मा ने केरल राज्य साक्षरता मिशन के 'अक्षरालाक्षम' साक्षरता कार्यक्रम में 100 में से 98 अंब हासिल कर टॉप किया है।  

गुरुवार (01 नवंबर) को केरल के मुख्यमंत्री सेमिनार हॉल में हुए सम्मान समारोह में सीएम पिनरई विजयन ने देश की मिसाल बनी 96 वर्षीय कर्थियानी अम्मा को सम्मानित किया। सम्मानित होने के बाद कर्थियानी अम्मा ने कहा, 'मैंने किसी से कॉपी नहीं किया, बल्कि मैंने दूसरों को मुझसे कॉपी करने दिया। मैंने उनको बताया कि क्या लिखना है।'

इस परीक्षा में कुल 43,330 परीक्षार्थियों ने भाग लिया था। इनमें से 42, 933 परीक्षार्थियों पास हुए। इनमें कर्थियानी अम्मा उम्र में सबसे बड़ी हैं। यह परीक्षा ​पढ़ने, लिखने और गणित के आधार पर आयोजित की गई थी।

केरल स्टेट लिट्रेसी मिशन के तहत अलग-अलग वर्ग के उन लोगों के लिए इक्विलेंसी एग्जाम (समानक परीक्षा) आयोजित की जाती है जो अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाएं। खबरों के अनुसार कार्तियानी अम्मा कभी स्कूल नहीं गईं। वह घरों में छोटा-मोटा काम करती रही। अपनी 51 वर्षीय बेटी से प्रेरणा लेकर उन्होंने पढ़ाई शुरू किया। अब वह आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है। कार्तियानी अम्मा आगे अब कंप्यूटर सीखना चाहती हैं।

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