जिला विद्यालय नीरिक्षक मांग रहा दो लाख घूस, नहीं मिली मृतक आश्रित को नौकरी

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लखनऊ। कांशीवर इंटर कॉलेज मोहनलालगंज के मृतक आश्रित की नियुक्ति के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को दो लाख रुपये की घूस नहीं दे पाने के कारण 10 माह से विद्यालय दर विद्यालय भटकने को अजय त्रिपाठी मजबूर हैं। प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा से उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी व्यक्तियों को दण्डित किए जाने की मांग उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ जिला संगठन ने की है। जिला संगठन द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि एक सप्ताह के अन्दर मृतक आश्रित को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया तो, 27 दिसम्बर, से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर प्रातः 10 बजे से अनिचितकालीन क्रमिक अनशन पर बैठेंगें।

 


नहीं हो पा रही नियुक्ति
          

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशीय मंत्री एवं जिला संरक्षक डा आरपी मिश्र, जिलाध्यक्ष अनुराग मिश्र, जिलामंत्री डा आरके त्रिवेदी व अन्य संगठन के अन्य लोगों ने क्वीन्स इण्टर कॉलेज में प्रेसवार्ता किया। पत्रकारों से बताया गया कि काशीश्वर इंटर कॉलेज में कला अध्यापक की आवयकता को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक को मृतक आश्रित को नियुक्ति कर दी जानी चाहिए थी। नियमानुसार किसी विद्यालय में नियुक्ति होने तक जिला विद्यालय निरीक्षक को अपने कार्यालय में ही नियुक्ति की जानी चाहिए। लेकिन अजय त्रिपाठी की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वे जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की घूस की मांग को पूरा नहीं कर पाए। इसलिए उनकी नियुक्ति अधिसंख्य पद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में नही की गई।


7 माह से वेतन भुगतान
        

शिक्षक नेताओं ने आश्चर्य व्यक्त किया कि एक ओर सत्यनारायण इं.का. निगोहा में लगभग 1200 छात्रों पर 04 कला अध्यापक नियुक्त हैं। जिसमें तीन कला अध्यापक अधिसंख्य पद पर हैं। एक अधिसंख्य पद पर नियुक्ति वर्तमान जिला विद्यालय निरीक्षक डा मुकेश कुमार सिंह द्वारा भी मार्च, 2018 उनके कार्यालय के प्रसन्न हो जाने पर की गई है। उन्हें लगभग 7 माह से वेतन भुगतान हो रहा है। वहीं, दूसरी ओर काशीश्वर इका में लगभग 2200 छात्र संख्या पर मात्र एक कला अध्यापक होने तथा विद्यालय प्रबन्धक द्वारा अधिसंख्या पद पर अजय त्रिपाठी की नियुक्ति की मांग के बावजूद नियुक्ति नही की गई।

 

  
नोटिस दिलवाना षड्यंत्र
   

शिक्षक नेताओं ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा मृतक आश्रित की नियुक्ति के लिए वेतन वितरण अधिनियम के अन्तर्गत प्रबन्धतन्त्र भंग करने की नोटिस दिलवाना एक षडयन्त्र लगता है।  वेतन वितरण अधिनियम के अन्तर्गत वेतन पा रहे शिक्षक का वेतन भुगतान न होने पर ही अधिनियम लागू होता है। जबकि मृतक आश्रित की शिक्षक के रूप में नियुक्ति ही नहीं हो पायी है। काशीश्वर इका के शिक्षक स्व महेन्द्र नाथ त्रिपाठी के मृतक आश्रित के रूप में उनके पुत्र अजय त्रिपाठी की जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा डीएवी इण्टर कॉलेज में 27 फरवरी, 2018 को कला अध्यापक के पद परं नियुक्ति की गई थी। विद्यालय प्रबन्धक द्वारा कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया और वे उच्च न्यायलय चले गए। जिससे अजय त्रिपाठी कार्यभार नहीं ग्रहण कर पाए।  


समायोजित करने के आदेश

 

शिक्षक नेताओं ने कहा कि कई माह बीत जाने के बाद भी जब जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कोई वेकल्पिक कार्यवाही नही की गईं इसके बाद जिला संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षा निदेशक से सम्पर्क किया। प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशक ने मृतक आश्रित अजय त्रिपाठी को किसी अन्य विद्यालय में समायोजित किए जाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक को आदेश दिया। लेकिन उनके आदेश को भी ठेंगे पर रख लिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा 12 अक्टूबर, 2018 को अजय त्रिपाठी को लखनऊ मान्टेसरी इका में समायोजित किया गया। लेकिन किन्तु पद रिक्त न होने की बात कह कर विद्यालय प्रधानाचार्य ने कार्य भार ग्रहण नहीं कराया।

        

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