राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के खिलाफ छात्रों ने की तालाबंदी

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शिब ओम हरि मिश्रा

बदायूं। भले ही केन्द्र सरकार और राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का दावा करती हो लेकिन बदायूं मे शिक्षा विभाग के अधिकारी इसे पलीता लगाने में कोई कोर कसर बाकी नही रखना चाहते। इसका प्रमाण आज जिला बदायूं के राजकीय इंटर कॉलेज नाधा मे साफ देखने को मिला। बदायूं के नाधा मे स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मे प्रभारी प्रधानाचार्य वीरपाल सिंह यादव की मनमानी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा इस कदर फूटा कि छात्र-छात्राओं ने कॉलेज के मेन गेट पर तालाबंदी कर दी। प्रधानाचार्य के खिलाफ प्रिंसिपल हाय हाय के नारे लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की वजह यह थी कि कॉलेज से संबद्ध की गई शिक्षिका को प्रिंसिपल ने रिलीव कर दिया ।जिससे इसका सीधा असर छात्र छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

 


प्राचार्य कर रहे शोषण

 

छात्र छात्राओं का यह भी आरोप है कि प्रधानाचार्य द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है और उनसे  प्रयोगात्मक परीक्षा के नाम पर 1500 रुपये वसूले गये है। किसी अन्य तरीके से छात्र-छात्राओं से पैसे की मांग करते रहते हैं। वहीं, राजकीय इंटर कॉलेज नाधा मे अध्यापकों की कमी के चलते चार महीने पहले राजकीय इंटर कालेज बदायूं से संबंद्ध की गई। महिला अध्यापक श्रष्टी शर्मा का भी प्रधानाचार्य द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा था। उन्होंने अपने उत्पीड़न की आवाज उठाई तो प्रभारी प्रधानाचार्य ने उन्हें भी रिलीव कर दिया और वह फिर अपने मूल विद्यालय में पहुंच गई। ऐसे में परीक्षा का समय नजदीक आने पर भी प्रिंसिपल की मनमानी से पढ़ाई चौपट हो रही देख  छात्र छात्राओं का गुस्सा बाहर आ गया और कॉलेज गेट की तालाबंदी कर दी।

 


डीआईओएस भी चुप


आपको बता दें कि पूरा मामला यह है कि कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य की मूल तैनाती बदायूं के करनपुर में स्थित राजकीय हाईस्कूल है। लेकिन विभागीय मिलीभगत से इन्हें राजकीय इंटर कॉलेज नाधा के साथ ही राजकीय इंटर कॉलेज सैदपुर का भी अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। विभागीय सांठगांठ के चलते इनके खिलाफ शिकायत के बाबजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है, बल्कि शिकायतकर्ता के खिलाफ ही झूठी शिकायतें कर दबाब बनाने की कोशिश की जाती है। जब शिकायत डीआईओएस से की गई तो उन्होंने भी कार्रवाही करना उचित नहीं समझा। अब देखना यह होगा कि क्या छात्रों का गुस्सा फूटने के बाद प्रंसिपल के खिलाफ कोई कार्रवाही होगी या विभागीय संरक्षण मिलता रहेगा।

 

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