गूगल ने डूडल बनाकर किया दादा साहब फाल्के को याद, जाने क्यों है ख़ास

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Father Of Indian Cinema कहलाने वाले दादा साहेब फाल्के के 148वें जन्मदिवस के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया है। दादा साहेब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल, 1870 को महाराष्ट्र के नासिक शहर में हुआ था उनका असली नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था दादासाहब फाल्के एक जाने-माने प्रड्यूसर, डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर थे जिन्होंने अपने 19 साल लंबे करियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट मूवीज़ बनाईं।  

दादा साहब फाल्के ने 'राजा हरिश्चंद्र' से डेब्यू किया जिसे भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म कहा जाता है। इसके अलावा उन्होंने 'मोहिनी भष्मासुर', 'सत्यवान सावित्री' और 'कालिया मर्दन' जैसी यादगार फिल्मों में काम किया। उनके पिता अपने जमाने के जाने माने विद्वानों मे से एक थे। दादा साहेब की पढा़ई लिखाई की बात की जाए तो उन्होंने अपनी पढा़ई मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से की थी तथा इस स्कूल से अपनी शुरुआती पढा़ई पूरी करने के बाद उन्होंने मूर्तिकला, चित्रकारी, फोटोग्राफी और इंजीनियरिंग से अपनी पढा़ई वडोदरा के महाराजा सैयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बडौ़दा से पूरी की।

गूगल ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में लिखा, 'दादासाहब फाल्के पर बने गूगल डूडल को कलाकार अलीशा नान्द्रा ने बनाया है। गूगल डूडल में युवा दादासाहब फाल्के को एक फिल्म रील के साथ ऐक्शन में दिखाया गया है। ' गूगल की ब्लॉग पोस्ट में आगे कहा गया, 'पेंटर, ड्राफ्ट्समैन, थिएट्रिकल सेट डिज़ाइनर और लीथोग्राफर के तौर पर अपना भाग्य आजमाने के बाद उन्हें एलिस गाय की साइलेंट फिल्म 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट' में मौका मिला। 

दादा साहेब फाल्के का 16 फरवरी साल 1944 में निधन हो गया था, कहा जाता है कि अपने जीवन के अंतिम समय में दादा साहेब को आखिरी बार फिल्म बनाने की इच्छा हुई जिसके लिए उन्हें ब्रिटिश सरकार से मंजूरी चाहिए थी। इसके लिए उन्होंने सरकार चिठ्ठी लिखी थी पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें फिल्म बनाने की इजाजत नहीं दी और इस वजह उन्हें गहरा सदमा लगा जिस वजह से वो दो दिन के भीतर ही दुनिया को अलविदा कह गए। 

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