गजब का जज्बा और हौसला है 108 एंबुलेंस सेवा में काम करने वाले दिव्यांगों का

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108-102 सेवा की सफलता में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका

विशाल मिश्रा

लखनऊ। पीएम मोदी ने विकलांगों को दिव्यांगों के रुप में नयी पहचान देकर जहां लोगों में उनके प्रति सहयोग की भावना को जगाया वहीं अब यही दिव्यांग अपने जज्बे से लोगों को यह बताने में भी पीछे नही हैं कि वे किसी कम नही हैं।

यूपी व देश के तमाम राज्यों में 108 एंबुलेंस सेवा का सफलतापूर्वक संचालन करने वाली अग्रणी कंपनी जीवीके ईएमआरआई ने अपने कंट्रोल रुम में ऐसे ही कई दिव्यांगों को कार्य करने का मौका दिया तो उन्होने अपने काम से अन्य सभी को पीछे छोड़ दिया है।

जी हां¸ यहां पर एक दो नही बल्कि डेढ़ दर्जन से अधिक ऐसे दिव्यांग कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही कुछ महात्वकांक्षी दिव्यांगों से बात की गयी तो उन्होने साफ तौर पर कहा कि वे किसी पर आश्रित होकर नही बल्कि स्वंय के बल पर बुलंदियों को छूना चाहते हैं।

क्या हैं इनके इरादे:-

1-रंजीत प्रताप सिंह प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और यहां पर आशियाना में पराग बूथ के पास किराये के मकान में रहकर राजधानी में आशियाना स्थित ही 108/102 एंबुलेंस सेवा के कार्यालय में बने कंट्रोल रूम में कॉल आपरेटर के रूप मे काम कर रहे हैं,इनके पिता क्लर्क हैं। रंजीत ने ग्रेजुएशन के साथ ही पीजीडीसीए डिप्लोमा भी कर रखा है। रंजीत से बात की गयी तो उन्होने कहा कि उन्हे किसी काम आना बहुत ही अच्छा लगता है,वे किसी के भरोसे नही होना चाहते हैं। रंजीत प्रतिदिन करीब 250 कॉल अटेंड करते हैं और 60 से 70 लोगों को एंबुलेंस उपलब्ध कराते हैं।

2-विजयलक्ष्मी मूल रुप से उन्नाव की रहने वाली हैं और यहां पर आशियाना में पावर हाउस चौराहे के पास किराये के मकान में रह कर एंबुलेंस के कॉल सेंटर में काम करती हैं। इनके पिता नही हैं फिर भी इनके हौसले किसी से कम नही हैं। विजयलक्ष्मी स्वंय कार्य करके अपने ही पैसों से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहीं हैं। उन्होने तैयारी के लिए कैरियर कोचिंग ज्वाईन कर रखी है। काम के बाद मिलने वाले समय में वे पढ़ाई करती हैं। उनका कहना है कि वे आगे चल कर पीसीएस बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। विजयलक्ष्मी को दूसरों की सेवा करना बहुत अच्छा लगता है। वे कहती हैं कि वे स्वंय के बल पर ही अपना मुकाम हासिल करना चाहती हैं। वे रोज करीब 300 कॉल अटेंड करती हैं और 100 जरुरतमंदों को एंबुलेंस उपलब्ध कराती हैं।
108 एंबुलेंस के कॉल सेंटर में ऐसे ही कई नाम हैं जो अपने जज्बे और बुलंद हौसलों के बल पर दूसरों के लिए एक उदाहरण बन गये हैं और पूरा कार्यालय इनके जज्बे को सलाम करता है।

क्या कहते हैं संस्था के अधिकारी:-

एंबुलेंस सेवा संचालन करने वाली संस्था जीवीके ईएमआरआई के महाप्रबंधक प्रमिल शाह बताते हैं कि संस्था के द्वारा दिव्यांगों को काफी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं और वे अन्य आपरेटरों की तुलना में काम भी काफी बेहतर और अच्छा परिणाम भी देते हैं। उन्होने बताया कि दिव्यांगों की नाईट ड्यूटी नही लगायी जाती हैं साथ ही उन्हे सीट पर ही लंच व ब्रेकफास्ट करने की छूट है। इसके अलावा उन्हे त्यौहरों में अवकाश भी दिया जाता है। श्री शाह ने बताया कि इनके आने जाने के लिए विशेष प्रकार का जीन भी बना है जिससे इन्हे कोई दिक्कत ना हो। उन्होने कहा कि हमारी सफलता में ये भी काफी महात्वपूर्ण कड़ी हैं और मै उनके जज्बे को खुद सलाम करता हू।

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