जानें, क्या है होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति !

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Health/स्वास्थ्य 

होम्योपैथी, एक चिकित्सा पद्धति है। होम्‍योपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के जन्‍मदाता डॉ॰ क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान है। यह चिकित्सा के 'समरूपता के सिंद्धात' पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियाँ उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है। जिन्हें रोग के लक्षणों के समान किंतु उनसे प्रबल होना चाहिए। अत: रोग अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से, अविलंब और सदा के लिए नष्ट और समाप्त उसी औषधि से हो सकता है जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सके।

होमियोपैथी पद्धति में चिकित्सक का मुख्य कार्य रोगी द्वारा बताए गए जीवन-इतिहास एवं रोगलक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करनेवाली औषधि का चुनाव करना है। रोग लक्षण एवं औषधि लक्षण में जितनी ही अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है। चिकित्सक का अनुभव उसका सबसे बड़ा सहायक होता है। पुराने और कठिन रोग की चिकित्सा के लिए रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। कुछ होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति के समर्थकों का मत है कि रोग का कारण शरीर में शोराविष की वृद्धि है।

होमियोपैथी चिकित्सकों की धारणा है कि प्रत्येक जीवित प्राणी हमें इंद्रियों के क्रियाशील आदर्श को बनाए रखने की प्रवृत्ति होती है औरे जब यह क्रियाशील आदर्श विकृत होता है, तब प्राणी में इस आदर्श को प्राप्त करने के लिए अनेक प्रतिक्रियाएँ होती हैं। प्राणी को औषधि द्वारा केवल उसके प्रयास में सहायता मिलती है। औषधि अल्प मात्रा में देनी चाहिए, क्योंकि बीमारी में रोगी अतिसंवेगी होता है। औषधि की अल्प मात्रा प्रभावकारी होती है जिससे केवल एक ही प्रभाव प्रकट होता है और कोई दुशपरिणाम नहीं होते। रुग्णावस्था में ऊतकों की रूपांतरित संग्राहकता के कारण यह एकावस्था प्रभाव स्वास्थ्य के पुन: स्थापन में विनियमित हो जाता है। विद्वान होम्योपैथी को छद्म विज्ञान मानते हैं।


               होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के बारे मे जाने।

1.होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति सबसे तेज असर करने वाली पद्धति है।
2. होम्योपैथिक दवाओ का साइड इफेक्ट भी हो सकता है अगर दवाई ठीक से नहीं ली जाए बिना डॉक्टर के सलाह के लिया जाये।
3. होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में किसी परहेज की जरूरत नहीं है।
4 .एक्यूट और क्रॉनिक दोनों बीमारियों में बेहद असरदार काम करती है।
5. लीवर के सभी रोगों में सबसे असरदार चिकित्सा पद्धति है।
6.किडनी रोगों में भी बहुत ही प्रभावी इलाज है।
7 . निसंतानता में बहुत ही अच्छे रिजल्ट है मेरा अपना अनुभव है कि अधिकतर महिलाओं को आईवीएफ कराने की जरूरत नहीं है।
8 .पुरुषों में भी बहुत अच्छा असरदार है शुक्राणु कम होना या दूसरी निजी समस्या का प्रभावी इलाज है
9 .स्लिप डिस्क ,, घुटनों का दर्द, जोड़ों का दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस मे असरदार इलाज है।
10 .बाल झड़ना, सफेद दाग, चेहरे पर झाइया,मुंहासे इत्यादि का होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में बहुत ही अच्छा इलाज है।
11 .डिप्रेशन माइग्रेन जैसी बीमारियों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है।
12 .गैस्टिक प्रॉब्लम ,फैटी लीवर का होम्योपैथिक में बेहतर इलाज है
13 .कोलेस्ट्रोल की समस्या का 30 से 90 दिन में पूर्णता छुटकारा पाया जा सकता है जिन लोगों को इलाज दिया गया वह लगभग सभी लोग पूर्णता ठीक है और अब कोई दवाई नहीं खा रहे हैं।
14 .थाइरोइड से जो लोग परेशान हैं वैसे पूर्णता छुटकारा पा सकते हैं क्योंकि अभी यह धारणा बनी हुई है कि थायराइड ठीक नहीं हो सकता हमारे कई मरीज पूर्ण तक ठीक हो चुके हैं जो काफी दिनों से कोई दवाई नहीं खा रहे हैं।   

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