जापान में होने वाली कराटे प्रतियोगिता में भारत का नेतृत्व करगी पांच साल नीलग्रीवा

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लखनऊ।  प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, अपने आत्मबल के दम पर नामुमकिन को मुमकीन करने का हौसला किसी को भीड़ से अलग करता है। ऐसी ही है पांच साल की नीलग्रीवा। नीलग्रीवा ने सेकेंड डान शॉतोकान कराटे में विश्व रिकार्ड बनाया। उसके इस रिकार्ड पर केन्द्रीय खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह ने पीठ थपथपाई, तो स्पोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया की निदेशक नीलम कपूर ने बच्ची की फाइल मंगाई। 

विश्व कराटे फेडरेशन के ब्लैकबेल्ट में नीलग्रीवा ने अपने से बड़े खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए रिकार्ड कायम किया। अप्रैल में तालकटोरा स्टेडियम में साउथ एशिया कराटे चैंपियनशिप में नील ने 7 वर्ष की कैटेगरी में सोने का तगमा हासिल किया। इसी के साथ नीलग्रीवा को इसी माह टोक्यो में होने वाले इंटरनेशनल शाटकेन ब्लैक बेल्ट प्रतियोगिता में भारत की ओर से खेलने का गौरव हासिल हो गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड यूके के 6 वर्षीय जेक फ्रॉड के नाम था। 

नीलग्रेव के पिता रामेन्द्र सिंह ने भारत सरकार से अपनी बेटी को अच्छी कोचिंग दिलाने के लिए आवश्यक सहायता राशि की मांग की है। बता दें, नीलग्रेव 2 डेन शॉटकेन कराटे में व‌र्ल्ड रिकॉर्ड बना चुकी है।

 

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स्पो‌र्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के डायरेक्टर नीलम कपूर का कहना है कि साई में हालांकि 9 वर्ष की आयु से रखने का प्रावधान  है, लेकिन विशेष परिस्थिति में जल्द ही इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी को साई में जोड़ा जाएगा। सेक्टर-32 के ग्रेटर स्कूल ऑफ मेट्रिल आ‌र्टस ऑर्गेनाइजेशन द्वारा दो दिवसीय शॉटकेन कन्नीजूको कराटे कम ग्रेड ट्रेनिंग टेस्ट का आयोजन किया था, जिसमें देश भर के 60 बच्चों ने भाग लिया था।

 

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टेस्ट की अध्यक्षता व‌र्ल्ड कराटे फेडरेशन के ब्लैक बेल्ट ए ग्रेड रेफरी परमजीत सिंह ने की, जिनमें नीलग्रेव ने अपने से बड़ों को पछाड़ते हुए रिकॉर्ड कायम किया। अप्रैल में तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित साउथ एशिया कराटे चैंपियनशिप में नील ने 7 वर्ष की कैटेगिरी में गोल्ड जीतकर अगस्त में टोक्यो में होने वाली इंटरनेशनल शॉटकेन ब्लैक बेल्ट में भारत की ओर से खेलने का गौरव हासिल किया।

 

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एफडी तोड़ने का तैयार

बेटी के लिए फिजियोथैरेपी छोड़ चुकी राजश्री ने कहा कि व‌र्ल्ड चैंपियनशिप को लेकर करीब साढ़े 5 लाख रुपये का खर्च आएगा। हालात इतने अच्छे नहीं हैं कि बेटी का पूरा खर्च उठा पाएं, लेकिन उनका कहना है लोन लेना पड़े या एफडी तोड़नी पड़े, लेकिन बेटी को तो खेलाना है। हालांकि पिता रामेंद्र ने इसके लिए खेल मंत्रालय, पंजाब सरकार, यूपी सरकार, कैबिनेट मंत्रियों को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय में 21 पदक जीत चुकी नील

यूपी के लखनऊ निवासी नील ग्रेव सिंह का जन्म 8 अगस्त 2012 को हुआ। मात्र 3 वर्ष की आयु में नील ने अपना पहला मेडल जीता। अभी तक वह नेशनल व इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता में 21 पदक जीत चुकी है, जिनमें 14 गोल्ड, 6 सिल्वर व 1 कांस्य पदक है। पिता रामेंद्र सिंह व माता राजश्री की बेटी का एक ही लक्ष्य है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना।

 

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युवा प्रतिभा नील के विश्व कीर्तिमान को लेकर केंद्रीय खेलमंत्री राज्यवर्धन राठौर ने ट्वीट कर उनके माता-पिता को बधाई दी । आगामी भविष्य के लिए इस खिलाड़ी को सहयोग देने का वादा भी किया। उन्होंने कहा कि, युवा प्रतिभा को सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे में आना चाहिए। इसके लिए बकायदा केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय को आगे आना होगा। हालांकि चाइना, जापान, कोरिया आदि देशों में सरकार का अहम योगदान है, तभी वह देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल दिला रहे हैं।

 

 

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