करुणानिधि के फिल्म से राजनीतिक कॅरियर का पूरा विश्लेषण सिर्फ एम-न्यूज पर

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आखिर पीले वस्त्र पहनने का क्या है पूरा राज

नई दिल्ली। अगर भारतीय राजनीति की बात की जाए तो करुणानिधि के योगदान को भुलाना शायद ही मुश्किल होगा। करुणानिधि ने ना सिर्फ अपनी बुद्धिमत्ता के माध्यम से फिल्मों में धूम मचाई बल्कि अपने टैलेंस और लीडरशिप क्वालिटी की वजह से उन्होंने राजनीति में भी झंडे गाड़े। उनको करीब से जानने वाले लोग उनकी तारीफ ही करते हैं। हम आपको करुणानिधि के पूरे कॅरियर  को डिकोड करने जा रहे हैं, हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर कैसे ने करुणानिधि ने स्टेप बाई स्टेप सफलता की सीढ़ी चढ़ी।

 

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करुणानिधि ने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में अपने कॅरियर  का शुभारंभ किया था। लेकिन अपनी बुद्धि और भाणष कौशल के माध्यम से वे बहुत जल्द एक राजनेता बन गए। जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर उन्होंने महज 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया था और तब से लेकर अब तक वो तमिलनाडु की राजनीति में बने हुए हैं। एक बुद्धजीवी होने के बावजूद बृहस्पति ग्रह शांति के लिए वो हमेशा पीला वस्त्र पहनते हैं। 94 वर्षीय करुणानीधि अपने 60 साल के राजनीतिक कॅरियर  में पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे हैं।

 

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वह पहली बार साल 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए थे और वर्ष 1996 में तत्कालीन डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अन्नादुरई की मौत के बाद मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद साल 1971, 1989, 1996 और 2006 में भी वह तमिलनाडु के सीएम बने। अपने पूरे राजनीतिक काल में उन्होंने अपनी भागीदारी वाले हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। ऐसा करने वाले वह देश के इकलौते नेता हैं। प्रतिबंधित संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ ईलम यानी एलटीटीई के साथ संबंधों को लेकर भी करुणानिधि चर्चा में रहे हैं। ये वहीं संगठन है जिसने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करवाई थी। करुणानिधि पर एलटीटीई को बढ़ावा देने का आरोप लगा था। यह आरोप राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाले जस्टिस जैन कमीशन की रिपोर्ट में लगाया गया था।

 

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बता दें कि यह आरोप राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाले जस्टिस जैन कमीशन की रिपोर्ट में लगाया गया था। अप्रैल 2009 में करुणानिधि ने एक विवादास्पद बयान देकर इस मामले को और तूल दे दिया था। उन्होंने कहा था कि एलटीटीई चीफ प्रभाकरण मेरा अच्छा दोस्त है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राजीव गांधी की हत्या के लिए भारत एलटीटीई को कभी माफ नहीं कर सकता।

 

 



 

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