अस्पतालों की दहलीज पर दम तोड़ते सरकारी दावे

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भारत के समाचार\ indianews  

 

मरीजों को सिर्फ पर्ची थमा नदारद हो जा रहे डॉक्टर

डाॅक्टरों की धींगामुश्ती से समय पर नहीं मिल रहा इलाज,

तीमारदारों का हंगामा

 

इकराम अली

शामली। बदलते मौसम के चलते लोगों में बुखार, उल्टी-दस्त, नजला व जुकाम तमाम तरह के रोग तेजी के साथ फैल रहे हैं। सरकारी हो या प्राईवेट अस्पताल हर जगह मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। तीमारदार बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल का ज्यादातर रुख कर रहे हैं, लेकिन यहां पर स्टाफ की धींगामुश्ती मरीजों की जान पर भारी पड़ती दिख रही है। रोज-रोज डाॅक्टरों के नदारद रहने से तीमारदार भी चिंतित है। हाल यह है कि अस्पताल में मरीजों की पर्ची तो बनाई जा रही है, लेकिन इलाज के लिए मरीजों व तीमारदारों को घंटों तक चिकित्सकों की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी जान किसी खतरे से खाली नहीं रह गई है।

 

 

 

 

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सरकार के बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आकर दम तोड़ रहे हैं। कैराना के सरकारी अस्पताल का हाल इन दिनों बुरा है। मरीज उपचार की उम्मीद लगाकर किसी प्रकार अस्पताल तक पहुंचते हैं, लेकिन उनके हाथ केवल निराशा ही लगती है, क्योंकि अस्पताल का स्टाफ अधिकतर अपनी ड्यूटी से नदारद रहता है। मंगलवार को भी अस्पताल से कई डाॅक्टर नदारद रहे, तो मरीजों व तीमारदारों ने अधीक्षक के कक्ष में  हंगामा खड़ा कर दिया। आरोप लगाया कि डाॅक्टरों को इलाज के लिए कई बार कहा गया, लेकिन उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की, जिस कारण वह घंटों से इधर-उधर भटक रहे हैं।

 

 

 

 

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इस बीच तीमारदारों के साथ मौजूद मरीज भी इलाज के अभाव में तड़पते रहे। कइयों ने सीएचसी के डाॅक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए। हंगामे के दौरान व बाद तक भी चिकित्सा अधीक्षक भी वहां से नदारद ही रहे। डाॅक्टरों की उदासीनता से मरीजों की जान भी खतरे में पड़ती दिख रही है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी भी इस ओर कोई संज्ञान नहीं ले रहे हैं। अस्पताल में मरीज अपने इलाज के लिए पर्चियां बनवाकर डाॅक्टरों के कमरों में पड़ी खाली कुर्सियों की ओर ताकते रहते हैं। सवाल यही है कि आखिर अस्पताल में चल रही अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों को कैसे उपचार मिल पाएगा।

 

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20 रूपये थे, किराए में दे दिए, अब क्या करूं

 

अस्पताल में मौजूद महिला नूरजहां ने बताया कि वह अस्पताल में दाद, खाज-खुजली तथा आंखों में इंफेक्शन की दवाई लेने आई थी। अस्पताल में न डाॅक्टरों ने देखा और न ही उसे दवाई दी गई। महिला ने बताया कि वह दवाई लेने के लिए अस्पताल आई थी, उसकी जेब में केवल 20 ही रूपये थे, जो रिक्शा के किराए के दे दिए, बाकी पैसे भी नहीं जो अपने घर तक चली जाऊं। अब कैसे करूं।

 

ओपीडी व अन्य वार्डों की शिकायत की

मोहम्मदपुर राई के दाऊद ने अस्पताल के खाली पड़े ओपीडी वार्ड तथा अन्य वार्डों की जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन पर अवगत कराया। दरअसल, ओपीडी, अधीक्षक कक्ष सहित अन्य कई वार्डों से डाॅक्टर नदारद थे। दाऊद ने बताया कि वह अस्पताल में अपनी गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए आया था, लेकिन महिला चिकित्सक ही नहीं मिली। उसे इधर-उधर चक्कर कटवाये जाते रहे।

 

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अधीक्षक का नंबर मिला स्विच आॅफ

मामले को लेकर सीएचसी अधीक्षक डाॅ. भानु प्रकाश से बातचीत करनी चाही, लेकिन कई बार ट्राई करने के बाद भी उनका मोबाइल फोन स्विच आॅफ आता रहा।

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