अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नागेश्वर राव को दी ये सजा

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सीबीआई के पूर्व आंतरिम निदेशक हैं राव,कोर्ट ने एक लाख का जुर्माना भी ठोंका

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करना सीबीआई के पूर्व ​आंतरिम निदेशक रहे नागेश्वर राव को भारी पड़ गया है कोर्ट ने मंगलवार को अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए नागेश्वर राव पर एक लाख रुपये का जुर्माना और कोर्ट के उठने तक कोने मे बैठे रहने की सजा सुना दी। राव ने कोर्ट के आदेश के विपरित बिहार में बालिका गृह मामले की जांच कर रहे ए के शर्मा को सीबीआई से बाहर ट्रांसफर करने कर दिया था जिस पर कोर्ट ने उन्हे अवमानना नोटिस जारी कर व्याक्तिगत रुप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया था।

सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सरकार के द्वारा अलांक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद आंतरिम निदेशक बनाये जाने के बाद चर्चा मे आये नागेश्वर राव के लिए सीबीआई के मुखिया के तौर पर उनका अल्प कार्यकाल ही भारी पड़ गया है।

निदेशक पद से हटाये जाने के बाद जब आलोक वर्मा ने सरकार के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी तब कोर्ट ने आंतरिम निदेशक के द्वारा किसी भी निर्णय के लिए जाने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी राव ने एक वरिष्ठ अधिकारी ए के शर्मा जो की बिहार में बालिकागृह जैसे संवेदनशील मामले की जांच कर थे को ना सिर्फ हटाया बल्कि उन्हे सीआरपीएफ में ट्रांसफर कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए राव को अवमानना को नोटिस देकर 12 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होने के आदेश दिया था। राव मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और उन्होने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट से माफी भी मांगी पर नाराज सीजेआई ने कोर्ट में राव का पक्ष रखने आये अटार्नी जनरल की दलील को अनसुना करते हुए उन्हे सजा सुना दी और जुर्माना भी ठोक दिया। 

चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लीगल एडवाइज़र ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफ़र करने से पहले सुप्रीमकोर्ट में हलफ़नामा दायर कर इजाज़त मांगी जाए, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि नागेश्वर राव को सुप्रीमकोर्ट के पुराने आदेश का पता था, तभी उन्होंने लीगल विभाग से राय मांगी और लीगल एडवाइज़र ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफ़र करने से पहले सुप्रीमकोर्ट में हलफ़नामा दायर कर इजाज़त मांगी जाए लेकिन, ऐसा क्यों नहीं किया गया?

वहीं नागेश्वर राव ने अपने माफीनामे में कहा,मैं गंभीरता से अपनी गलती महसूस करता हूं और बिना शर्त माफी मांगने के दौरान मैं विशेष रूप से कहता हूं कि मैंने जानबूझकर इस अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं किया क्योंकि मैं सपने में भी इस अदालत के आदेश का उल्लंघन करने की सोच नहीं सकता।

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