बाबा रे बाबा : एक सी हैं काली करतूत की कोठरी

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India News / भारत के समाचार


नई दिल्ली। एक के बाद एक बाबाओं की काली करतूतों वाली कोठरियों की कहानियां सामने आ रही है। ये सब धर्म के नाम पर धवल वस्त्रों की आड़ में होने वाले ऐसे गुनाहों की सच्ची कहानी है जिसपर सहसा विश्वास भी न हो सके। लोक—परलोक सुधारने का दावा करने वाले ये स्वयंभू भगवानों के कारनामें एक से हैं। साधना के नाम पर तैयार घुप्प अंधेरी कोठरियों में लोगों की आस्था तार—तार होती है, धर्म जार—जार रोता है और ईश्वर भी अपनी कृति पर शर्मसार होता होगा।

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यही कड़वी हकीकत है उस कलियुग की जिसमें हम जी रहे हैं। बाबा गुरमीत राम रहीम, आसाराम बापू के बाद इसमें नई कड़ी जोड़ी है तथाकथित संत व शनि उपासक दाता महाराज उर्फ मदनलाल। इन काले कारनामों वाले बाबाओं ने लोगों पर धर्म का ऐसा खौफ कायम किया और फिर जो चाहा उसे अंजाम दे डाला। यह सब वर्षों से यूं ही चलता चला आ रहा था, जब किसी ने साहस दिखाया तो उनके काले कारनामों का भंडाफोड़ हो सका।

अब अगर इन बाबाओं के कारनामों पर नजर डाले तो पता चलता है कि ये लगभग एक ही तरह से अपना शिकार फंसाते थे और उनकी ध्यान की कोठरी बनती थी उनकी अय्याशी का अड्डा। इन कलियुगी बाबाओं ने अपनी शिष्याओं को शिकार बनाया। इनमें से एक नाबालिग और दो युवतियां शामिल हैं। शिष्याओं को बाबा तक पहुंचाने में आश्रम की संचालिका या फिर किसी महिला ने ही उनकी मदद की। शिष्याओं को ध्यान की उस कोठरी में बुलाया जाता था जहां पहले से अंधेरा रहता था और उनका यौन शोषण किया जाता था।

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बात न मानने और किसी को बताने पर परिवार को मार डालने की धमकी दी जाती थी। जिस शिष्या पर बाबा नजर डालते थे उससे पहले उस शिष्या पर मनोवै​ज्ञानिक तरीके से दबाव बनाया जाता था। कुछ ​पुरानी शिष्याएं इसे गुरु की सेवा बताती और विरोध न करने की सलाह दी जाती। इस तरह से जब शिकार को तैयार कर लिया जाता तो उन्हें बाबा की कोठरी में भेज दिया जाता था। दाती महाराज के मामले में भी ऐसा ही कुछ सामने आया है। इस मामले में सिर्फ एक बात थोड़ी अलग है वह यह कि पीड़ित शिष्या ने दाताी महाराज के साथ उनके दो शिष्यों पर भी यौन शोषण का आरोप लगाया है।

 

 

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