बच्चों को मोबाइल के नाम पर कोकीन तो नहीं दे रहे आप?

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लखनऊ। आज का पैरेंट्स बच्चों की 'सिक्योरिटी' को लेकर थोड़ा 'कांसस' हो गया है। लेकिन वहीं यह भी सच है कि बच्चों की जिद या फिर उसे ज्यादा लाड़—प्यार देने के चक्कर में शायद यह भूल जाता है कि वह उसको जो सुविधाएं मुहैया करा रहा है वह वास्तव में उसके लिए सुविधा ही देगी या उसके लिए असुविधा पैदा कर सकती है?

 

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बताते चलें कि आज बच्चों, किशोरों के हाथों में मोबाइल आसानी से देखा जा सकता है। बच्चों के मोबाइल सेवी होने पर बहुतायत पैरेन्ट्स गर्व भी महसूस करते हैं और बड़े ही शौक से बताते हैं कि हमारा बच्चा मोबाइल के सभी फीचरों को बेहतर ढंग से आपरेट कर लेता है। लेकिन शायद वह यह भूल जाते हैं कि मोबाइल के नाम पर वे अपने बच्चों को 'कोकीन'पकड़ा रहे हैं। मोबाइल इस्तेमाल के आदी हो चुके बच्चों के बारे जो शोध सामने आया है वह बेहद खौफनाक है। मसलन अगर आप अपने बच्चे को मोबाइल या टैबलेट पकड़ा रहे हैं तो उससे होने वाले खतरों के प्रति भी जानना होगा।

शोधों के बाद पता चला कि दुनिया के सबसे अमीर लोगों शुमार बिलगेस्ट ने भी अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल और टैबलेट से दूर रखा। कमोवेश इसी तरह स्टीव जॉब्स ने भी न्यूयार्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को कभी भी आईपॉड या फिर मोबाइलफोन इस्तेमाल नहीं करने दिया। वहीं मोबाइल के साईड इफेक्ट को लेकर आए शोधों की बात करें तो जो बच्चे स्मार्टफोन किसी भी रूप में इस्तेमाल करते हैं जैसे कि वीडियो देखने, गाना सुनने आदि में वे बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में देर से बोलना शुरू करते हैं 6 माह से 2 साल तक 900 बच्चों पर किए गए सर्वे में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। 

 

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38 मिनट के स्क्रीन टाइम मोबाइल इस्तेमाल से ही 49 प्रतिशत असर ऐसे बढ़ जाते हैं कि बच्चा देरी से बोलना शुरू करता है। वही दुनिया की जानी-मानी एडिक्शन थैरेपिस्ट मेडिकल गिरी ने तो यहां तक कहा कि बच्चों को स्मार्टफोन देना उन्हें एक कोकीन देने के बराबर 1 ग्राम कोकीन देने के बराबर है।

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