OBC आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाला बिल लोकसभा में पास, राज्यसभा में किया गया पेश

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कांग्रेस का समर्थन का ऐलान, बिल पास होने पर आयोग को होगी स्वयं की प्रक्रिया निर्धारित करने की शक्ति 

 

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक दर्जा देने के संबंध में सोमवार को 123वां संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश कर दिया गया। इसके पहले इसे लोकसभा में पास किया जा चुका है। सरकार की तरफ से इस बिल में कुछ संशोधन किए गए हैं। इस संशोधन के तहत आयोग में महिला सदस्य को भी शामिल किया गया है साथ ही राज्यों के अधिकरों में हस्तक्षेप को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को भी दूर करने का प्रयास किया गया है। राज्यसभा में बिल को कांग्रेस ने भी अपना समर्थन देने का ऐलान किया है।

 

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बता दें कि इस विधेयक को लेकर सरकार की तब किरकिरी हो गई थी जब पिछले वर्ष राज्य सभा में इस बिल पर विपक्ष का संशोधन पास हो गया था। लिहाजा सरकार की तरफ से बिल में कुछ संशोधन कर दोबारा पेश करना पड़ा।

सरकार द्वारा पेश यह संशोधन विधेयक लोकसभा में तो पास हो गया लेकिन इसे राज्यसभा में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल राज्यसभा में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। अगर सपा और बीजेडी इसे अपना समर्थन देती है तो यह संशोधन विधेयक पास हो जाएगा।

इस विधेयक के पास होने के बाद सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा। इस आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे। इन सभी लोगों को प्रदत्त शक्तियां राष्ट्रपति के अधीन होंगी। इसके अलावा आयोग को अपनी स्वयं की प्रक्रिया निर्धारित करने की शक्ति होगी।  

 

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ज्ञात हो कि 1993 में गठित पिछड़ा वर्ग आयोग की अभी तक केवल सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ी जातियों को पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल करने या शामिल जातियों को सूची से बाहर करने का काम करता था। इस विधेयक के पास होने के बाद संवैधानिक दर्जा मिलने के कारण संविधान के अनुच्छेद 342 (क) जोड़कर आयोग को सिविल न्यायालय के समकक्ष अधिकार दिए जा सकेंगे।

 

 

 

 

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