शिवसेना की BJP को नसीहत, कन्हैया मामले का राजनीतिक फायदा ना उठाएं

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नई दिल्ली। शिवसेना का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से हाथ मिलाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छात्र नेता कन्हैया कुमार की आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं है।

शिवसेना ने सत्तारूढ़ भाजपा को नसीहत दी कि उसे जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ राजद्रोह मामले का राजनीतिक लाभ नहीं उठाना चाहिए। 

शिवसेना ने कहा कि भाजपा ने पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती से हाथ मिलाकर पाप किया। महबूबा मुफ्ती संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को शहीद मानती है। 

कन्हैया कुमार को बेहतरीन वक्ता बताते हुए शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा, 'कन्हैया बागी और बेरोजगार युवाअें का प्रतिनिधित्व करते है, तब वह अफजल गुरू की प्रशंसा करते हुए या कश्मीर की आजादी के नारे नहीं लगा सकते। वैसे भी भाजपा को कन्हैया कुमार की निंदा करने का क्या नैतिक अधिकार है?'

बता दें कि कन्हैया कुमार और उमर खालिद के खिलाफ़ देशद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के मुताबिक, गवाहों के बयानों के बाद देशद्रोह का ये मामला दर्ज किया गया है।

9 फरवरी 2016 को कथित तौर पर जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाए गए थे। कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान को जेएनयू परिसर में कथित रूप से संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी पर लटकाए जाने के विरोध में कथित रुप से कार्यक्रम करने को लेकर 2016 में देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

इस सभी पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि उनकी गिरफ्तारी से बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। विपक्ष ने पुलिस पर सत्ताधारी बीजेपी की शह पर काम करने का आरोप लगाया था।

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