कैसे मायावती ने छोड़ी आईएएस बनने की राह और बनी दिग्गज़ राजनेत्री?

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National News / राष्ट्रीय समाचार

लखनऊ। भारत की राजनीति में बहन जी के नाम से लोकप्रिय मायावती आज अपना 63वां जन्मदिन मना रही है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे ज्यादा चार बार सूबे की मुखिया बनी मायावती एक सख्त शासक और आयरन लेडी के तौर पर जानी जाती रहीं हैं।

 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की सख्ती की वजह से उनके कार्यकाल में जहां कानून का राज स्थापित करने के लिए उनकी तारीफ होती रही है तो वहीं कई राजनीतिक आलोचक उन्हें 'तानाशाह' भी बताते रहे है।

बसपा सुप्रीमो मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को हुआ था। मायावती बचपन में आईएएस ऑफिसर बनना चाहती थी। एक बार जब कांशीराम ने सीधे उनसे पूछा कि पढ़कर क्या बनना चाहती हो तो मायावती ने जवाब दिया था आईएएस ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना चाहती हूं। 

यह जवाब सुनकर कांशीराम ने कहा कि कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि देश और प्रदेश की सरकारें जो चाहेंगी वही करना होगा। आगे उन्होंने कहा कि हमारे देश में कलेक्टर की कमी नहीं है, कमी है तो ऐसे नेता की जो उनसे काम करवा सके। मायावती कांशीराम की बातों से प्रभावित हुई। उन्होंने कलेक्टर बनने का सपना छोड़ और नेता बनने की ठानी।

देश की सेवा के लिए मायावती ने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय इसलिए लिया ताकि जीवन भर समग्र और ए​कनिष्ठ भाव से बहुजन समाज के लोगों की सेवा में स्वयं को समर्पित कर सकें।

राजनीति में आने पर मायावती के पिता ने उनका साथ छोड़ दिया था। उनके राजनीतिक उनके राजनीतिक करियर से लेकर जिंदगी के हर मोड़ की कहानी बेहद दिलचस्प है। हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ लोकसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन की घोषणा की है।

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