ख्वाब से अब हकीकत बनेगी बुलेट ट्रेन    

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एक सप्ताह बाद खुलेगा पहला टेंडर

 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को लेकर लगाई जा रही अटकलों को अब बिराम लगने वाला है। बुलेट ट्रेन को महज एक ख्वाब बताने वालों की जुबान पर भी ताला लगने जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री का यह प्रोजेक्ट अब हकीकत बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है इस परियोजना से सम्बंधित पहला टेंडर महज एक सप्ताह बाद या​नि 3 अगस्त को होने जा रहा है। 

 


गौरतलब है कि बीते साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के साथ देश में बुलेट ट्रेन दौड़ाने का एक डील साइन किया था जिसको लेकर विपक्ष हमेशा यह कहता रहा है कि यह महज ​हवा-हवाई है। लेकिन वहीं इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा हाई स्पीड रेल कार्पोरेशन का गठन किया है। कार्पोरेशन ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधीग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में लगी हुई है। वहीं कार्पोरेशन 3 अगस्त को इस परियोजना से जुड़ा पहला टेंडर भी ओपन करने जा रहा है।  

 

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हाईस्पीड रेल कार्पोरेशन से मिली जानकारी के मुताबिक परियोजना से जुड़ा यह पहला टेंडर  210 मीटर लंबे विशेष पुल के लिए ओपन होने जा रहा है जो बुलेट ट्रेन कोरिडोर के उन 59 पुलों में शामिल हैं, जिन्हें निकट भविष्य में बनाया जाना है। यह प्री-स्ट्रैस्ड बैलेंस पुल गुजरात के नवसारी जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर बनना है। 


कार्पोरेशन सूत्रों ने मीडिया को बताया कि मुंबई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए कुल 26 टेंडरों का पैकेज तय किया गया है।  इसमें छह टेंडर आमंत्रित किए गए। छह टेंडर में से जो टेंडर तीन अगस्त को खुलेगा, वह मुंबई की ओर 235.379 किमी पर पुल संख्या दस से संबंधित है। 
यह जानकारी रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को सांसद के अशोक कुमार को दिए लिखित जवाब में दी है। 


वहीं दूसरी तरफ सांसद विनायक भाऊराव, आनंदराव, डॉ. प्रीतम, धर्मेंद्र यादव, श्रीरंग, आधलराव पाटिल ने रेल मंत्री से लिखित में बताने को कहा था कि क्या बुलेट ट्रेन केवल अमीर वर्ग की आवश्यकताओं की पूर्ति करेगी और साधारण लोगों की पहुंच से दूर होगी। इस पर रेल मंत्री ने कहा है कि बुलेट ट्रेन के संचालन से वैश्विक निवेश बढ़ने की संभावना है। वहीं इसे यात्रा में समय कम खर्च होगा। जिससे रेलयात्रियों के लिए किफायती विकल्प होगा।

 

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रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि परियोजना के लिए जापान से 0.1 प्रतिशत ब्याज दर पर 50 साल के लिए लोन मिला है। 15 साल तक ब्याज का भुगतान नहीं करना होगा। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को पांच गुना ज्यादा मुआवजा देने पर काम चल रहा है।

 

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