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मोदी के दावों को कैग का आईना

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भारत के समाचार, News of India 

 

1779 करोड़ के घोटाले पर चुप आखिर चुप क्यों हैं भाजपा के मंत्रालय?

 

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके तमाम मंत्री रैलियों, जन सभाओं सहित टेलीविजन चैनलों पर होने वाले डिवेटों में भाजपा के तमाम प्रवक्ता भले ही यह दावा करने से नहीं अघा रहे हों कि केन्द्र की मोदी सरकार में कहीं भी घपले-घाटाले और अनियमितता सरीखी घटनाएं नहीं हो रही हैं। लेकिन, हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी आ​डिट संस्था 'कैग' नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने सरकार के तकरीबन 19 मंत्रालयों में 1779 करोड़ की अनियमितता उजागर करते हुए उनके इस दावे को आईना दिखा दिया है। वहीं कैग के इस खुलासे के बाद ये आरोपित मंत्रालय खुलकर जवाब जवाब नहीं दे पा रहे हैं। 

 

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गौरतलब है कि चंद दिन पहले ही कैग ने चालू वित्तीय वर्ष में जारी आपनी आॅडिट रिपोर्ट के क्रमांक संख्या-4 में उल्लिखित किया है कि भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, सांस्कृतिक मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय सहित कुल 19 मंत्रालयों तथा उनके अधीनस्थ विभागा में तकरीबन 1779 करोड़ रुपए के घोटालों को अंजाम दिया गया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि इन मंत्रालयों ने नियम और कानून को धता बताते हुए जमकर फिजूलखर्ची की है। 

 

 

कैग ने लिखा है कि भारत सरकार के इन मंत्रालयों ने खर्चों में तकरीबन 38 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी अचानक कर दी है, जिसका कोई ठोस आधार नहीं बनता दिख रहा है। इन मंत्रालयों के जो खर्चे बीते वर्षों में 5334037 करोड़ रुपए की थी वह वर्ष 2016-17 में बढ़कर 7362394 करोड़ रुपए पहुंच गई। कैग का मानना है कि अचानक इतने बड़े पैमाने पर बढ़ाए खर्चे मंत्रालयों के जिम्मेदारों को शक के कठघरे में खड़ा करते हैं। 

 

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कैग रिपोर्ट के आधार पर विदेश मंत्रालय में तकरीबन 76 करोड़ रुपए की अनियमितता सामने आई है। माना जा रहा है कि इस तरह की अनियमितता वीजा फीस में आई कमी के चलते पैदा हुई है जबकि वहीं तीन अन्य मंत्रालयों के अधीन संचालित विभागों ने 8956 करोड़ की वसूली को ही भूल गया और उसके प्रति जिम्मेदारी नहीं दिखाई गई। वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, मि​निस्ट्री आफ शिपिंग का भी इसमें समावेश है। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक प्रबंधन से जुड़े अन्य तीन मंत्रालयों द्वारा गैर कानूनी तरीकों को अपनाने से भी केन्द्र सरकार के राजस्व को 1933 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। 

कमोवेश कुछ इसी अंदाज में विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य, मानव संसाधन विकास मंत्रालयों में भी 10 ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें 6586 करोड़ रुपए राजस्व का भयंकर नुकसान हुआ है। वहीं कैग अधिकारियों ने आपत्ति जताते हुए यह भी कहा है कि इन घोटालों और अनियमितता के सम्बंध में ये मंत्रालय और उनके जिम्मेदार कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। 

 

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