CBIvsCBI : SC ने की सरकार की खिंचाई, पूछा 'वर्मा को अचानक क्यों हटाया?'

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National News / राष्ट्रीय समाचार

नई दिल्ली। सीबीआई बनाम सीबीआई मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की खिंचाई की। कोर्ट ने सरकार ने पूछा कि सीबीआई डॉयरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने से पहले सरकार ने सिलेक्शन कमिटी से सलाह क्यों नहीं ली थी।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ कर रही है। पीठ ने सरकार से पूछा कि सरकार को सिलेक्शन कमिटी से सलाह लेने में क्या दिक्क्त थी। तीन जजों की पीठ ने पूछा, 'यह पूरी तरह उचित नहीं है। सरकार को किसी भी प्रकार की कार्रवाई का आशय शासन के लिए ठीक होना होता है।'

बता दें कि सिलेक्शन कमिटी में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया और नेता प्रतिपक्ष या विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता होते हैं। वर्मा ने कोर्ट में तर्क दिया है कि उनके दो साल के तय कार्यकाल को सिलेक्शन कमिटी की सलाह के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सिलेक्शन कमिटी से सलाह नहीं लेने से बेहतर सलाह लेना है। यह कानून के पालन का नहीं बल्कि कानून के बेहतर पालन का सवाल है। यहां तक कि अगर जरूरत होती है तो क्या किसी कमिटी से किसी स्टेज पर सलाह नहीं ली जा सकती।

साथ ही न्यायालय ने सरकार के पक्ष में भी संदेह जताया कि असाधारण परिस्थिति में यह कार्रवाई आवश्यक थी। कोर्ट ने पूछा कि केंद्र सरकार और सीवीसी इस मामले को जुलाई तक झेलती रही, तब तक सिलेक्शन कमिटी से संपर्क क्यों नहीं किया। इससे यह मालूम पड़ता है कि आलोक वर्मा को रातोंरात छुट्टी पर नहीं भेजा गया ​बल्कि यह अक्टूबर में तय कर लिया गया था।

सुनवाई करते हुए सीजेआई गोगोई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि आखिर ऐसा क्या हो गया था कि सरकार को 23 अक्टूबर को ही छुट्टी पर भेजने का फैसला करना पड़ा। सीजेआई ने कहा कि वर्मा कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले थे तो कुछ महीने इंतजार क्यों नहीं किया गय और सिलेक्शन कमिटी की सलाह क्यों नहीं ली गई।

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