सीबीआई रिश्वत मामला: निदेशक के खिलाफ नहीं मिला कोई ठोस सबूत

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भारत के सामाचार/National News

 

नई दिल्ली। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर दो करोड़ घूस के आरोप मामले की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) उच्चतम न्यायाल के रिटायर्ड जज ए के पटनायक की अध्यक्षता में कर रही थी। जांच में घूस लेने के कोई भी ठोस सबूत वर्मा के खिलाफ आयोग को नहीं मिले हैं। बताते चलें कि अस्थाना और आलोक ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जांच के आदेश दिए थे। 

 

 

क्या है मामला

 

बताते चलें कि न केवल सीबीआई निदेशक बल्कि दो नंबर के अधिकारियों के खिलाफ भी आरोप लगे थे। मामले में अधिकारियों के खिलाफ 15 अक्तूबर को केस भी दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही गत 24 अगस्त को आलोक वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को शिकायती पत्र भी लिखा गया था। सीबीआई विशेष निदेशक से प्राप्त शिकायती पत्र को सचिव ने सीवीसी के पास जांच के लिए भेज दिया था। इस शिकायती पत्र में अस्थाना ने वर्मा पर आरोप लगाया था कि काराबारी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रूपए की डिमांड की गई। इसके बाद जांच एजेंसी मीट कारोबारी मोईन कुरैशी से प्रकरण को लेकर पूछताछ में जुटी थी। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी की प्राथमिक जांच पूरी हो चुकी है। अब रिपोर्ट सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सौंप दिया जाएगा।

 

 

कई सबूतों की जांच

 

खबरों के मुताबिक सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की शिकायत और सौंपे गए सबूतों को लेकर कई बिन्दुओं पर जांच पूरी कर ली गई है। जांच में कोई भी ठोस सबूत नहीं पाए गए हैं। बताते चलें कि जांच टीम में सीवीसी केवी चौधरी और विजिलेंस कमिश्नर शरद कुमार के साथ ही टीएम बसीम भी शामिल रहे। गौरतलब है कि विशेष निदेशक की शिकायत के करीब दो महीने बाद ही सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद व सोमेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। करोबारी सतीश बाबू के आरोपों और बयान को आधार बनाया गया था।

 

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