चुनाव परिणाम: मतगणना स्थलों पर वाईफाई- वेबकॉस्टिंग पर रोक 

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National News / राष्ट्रीय समाचार

 


नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों की धड़कने तेज हो गई हैं। कांग्रेस की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि मतगणना स्थल पर न तो वेबकास्टिंग होगी और न ही वाई फाई। सभी मतगणना स्थलों पर सीसीटीवी से पैनी नजर रखी जाएगी। यह निर्णय आयोग ने देर रात ​लिया है। कांग्रेस ने आयोग से यह भी मांग की है कि वेबकास्टिंग में जियो की जगह पर बीएसएनएल नेटवर्क का प्रयोग किया जाए। शिकायत को देखते हुए इंकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस इस बात से सशंकित है कि मतगणना स्थलों पर भी गड़बड़ियां की जा सकती है।

 


इस पर भी आपत्ति


कांग्रेस ने आयोग में इस बात पर भी आपत्ति दर्ज कराई है कि वेबकास्टिंग से जो काम लिया जाना है, उसका ठेका गुजरात की कंपनी संघवी इन्फोटेक को ही क्यों दे दिया गया। खबरों के मुताबिक इन्फोटेक के कुछ इंजीनिय भोपाल व सागर में वेबकास्टिंग के लिए कैमरे इंस्टॉल कर रहे थे, उस दौरान कांग्रेसियों ने इंजिनियरों का नाम पूछा था।  एक ने नाम बताया और कहा कि उसका निवास स्थान गुजरात है। इस घटना के बाद कांग्रेस ने बवाल काटा। 


आयोग पर उठाए सवाल


कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश का खुद का डोमेन (प्लेटफॉर्म) है। ऐसे में मतगणना से संबंधित जानकारियों को देने के लिए निजी कंपनी को ठेका किसलिए दे दिया गया। कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने एमपी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से सभी मामलों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि, आयोग ने पहले तो कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज कर दिया। लेकिन पता नहीं क्या सोचा गया कि रातों रात ही कांग्रेस की आपत्तियों पर निर्णय ले लिया गया।

 


ये होती है वेबकास्टिंग


आपको बताते चलें कि वेबकास्टिंग के माध्यम से वीडियो कैमरा मतगणना केंद्र में ऐसी जगह पर लगाया जाता है कि सभी तरह की गतिविधियों पर नजर रहे। इस कैमरे को सेंट्रलाइज्ड सर्वर से जोड़ा जाता है। इसके जरिए मतगणना केंद्र का सीधा प्रसारण भारत निर्वाचन आयोग एवं राज्य निर्वाचन आयोग के अफसर देखते हैं। बताया जा रहा है कि इस बार परिणाम आने को लेकर थोड़ी देरी हो सकती है। चूंकि कांग्रेस की दर्ज आपत्तियों के अनुसार आयोग ने मांग स्वीकार करते हुए यह निर्णय भी लिया है कि वोट काउंटिंग के समय हर राउंड के बाद परिणामों की जानकारी लिखित में दी जाएगी।


इन राज्यों में भी लागू


बताते चलें कि न केवल एमपी में बल्कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना व अन्य राज्यों में भी ये प्रक्रिया लागू है। चुनाव आयोग दिल्ली से इस बाबत आदेश भी जारी कर चुका है। गौरतलब है कि ईवीएम को लेकर पहले ही सवाल उठते रहे हैं। इस बात को लेकर आयोग ने ये निर्णय लिया है। यहां तक कि कांग्रेस ने ईवीएम की सुरक्षा और स्ट्रांग रूम में रखरखाव को लेकर आयोग से शिकायत दर्ज कराई। वहीं, बीजेपी ने भी मांग की है कि वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होगी।

 

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