सीएम साहब, बचा लीजिए 'खादर' के बाशिंदो को, उफान पर है, बहा ले जाएगी सबकुछ...

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हल्की बारिश में ही यमुना के तटबंध में हुआ कटान शुरू
बाढ से निपटने के प्रसाशन के दावों की खुली पोल
राहत चैकियां स्थापना की, लेकिन नही है बाढ से बचाव के उपाय

 

मानसून शुरू होने के साथ यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर से जनपद शामली के खादर के बाशिंदों की धड़कनें भी बढ़ने लगी है। प्रतिदिन यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग की तमाम तैयारियां पूर्ण करने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। जिस तटबंध में मामूली बारिश से ही कटान शुरू हो गया, वह यमुना के उफान आने पर कैसे महफूज रह पाएगा, यह बड़ा सवाल है। खादर के बाशिंदे अभी से बाढ़ के खतरे को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

पिछले एक महीने से यमुना नदी में बराबर पानी चल रहा है। जीवनदायिनी यमुना नदी मानसून में खादर क्षेत्र के बाशिंदों और किसानों को चिंता से दो-चार कर देती है। क्षेत्रवासियों का हमेशा दर्द रहा है कि प्रशासन व सिंचाई विभाग समय रहते बाढ़ से निपटने के बंदोबस्त नहीं करता। इसीलिए पूर्व मानसून में कई गांवों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए थे। बांध भी टूट गया था। इस बार भी हालात कुछ बदले नजर नहीं आ रहे हैं। यमुना तटबंध जगह-जगह से जख्मी हैं, जिसमें गहरे-गहरे गड्ढ़े बने हुए हैं। पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मामूली बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इस बारिश में तटबंध जगह-जगह से कटना शुरू हो रहा है।

 

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हालात खराब होते जा रहे हैं, लेकिन, प्रशासन और सिंचाई विभाग की तंद्रा टूट नहीं पाई है। हालांकि, अधिकारियों ने बाढ़ से निपटने के लिए बाढ राहत चैकियां स्थापित करने तथा तमाम तैयारियां पूरी कर लेने का दावा किया है, जो मात्र हवा-हवाई साबित होकर रह गया है। सवाल है कि जिस यमुना नदी किनारे तटबंध मामूली बारिश में कटना शुरू हो जाए, वो यमुना के उफन आने पर कैसे टिक पाएगा। कुछ भी हो तटवर्ती गांवों में मानसून में अभी से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
 

 

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खनन ने जख्मी किया तटबंधसुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के खनन पर पूर्णतः रोक के आदेशों के बावजूद भी अवैध खनन का काला कारोबार यमुना नदी से कभी रूक नहीं पाया। कभी वैध पट्टों की आड़ में तो कभी प्रशासन की साठगांठ से खनन का खेल फल-फूलता रहा है। पूर्व में सीबीआई जांच भी कर चुकी है, बावजूद इसके खनन माफियाओं का इकबाल बढ़ता ही गया। यही कारण है कि अवैध खनन के कारण आज तटबंध के हालात चिंताजनक बन गए हैं।

 

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26 गांव में तबाही मचा चुकी यमुना -वर्ष 2014 में यमुना नदी में बरसात के मौसम में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में अत्याधिक बारिश के चले यमुना नदी बौरायी थी, जिस कारण कई जगह से तटबंध टूट गया था। उस समय तहसील क्षेत्र के 26 गांवों में बाढ आ गई थी, जिसमें लोगों को भारी तबाही का दंश झेलना पड़ा था। अब फिर से लोगों में बाढ़ का खतरा सताने लगा है।-अधिकारी कहिन...‘‘यमुना नदी के तटबंध के हालात यदि खस्ताहाल है, तो संबंधित विभाग को इससे अवगत कराया जाएगा और मरम्मत कार्य कराया जाएगा।’’

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