कांग्रेस और टीएमसी ने कर दी लोकतंत्र की हत्या: जावडेकर  

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नई दिल्ली। एनआरसी 'नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन' मुद्दे पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रवैये पर वार करते हुए केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने लोकतंत्र की हत्या कर दी। यह बात जावडेकर ने आज भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान कही। 


जावड़ेकर ने कहा कि आज नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) के ज्वलंत मुद्दे पर सदन में चर्चा के दौरान सभापति ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को अपना वक्तव्य पूरा करने के लिए बुलाया क्योंकि कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस एवं उनकी अन्य सहयोगी पार्टियों के सदस्यों ने जानबूझ कर व्यवधान पैदा किया और अमित शाह जी को अपना वक्तव्य बीच में ही रोकना पड़ा।  

 

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जावड़ेकर ने राज्य सभा में हुईआज की कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे ही अमित शाह अपने भाषण को पूरा करने खड़े हुए तो पहले कांग्रेस पार्टी के आनंद शर्मा ने आपत्ति जताई कि  अमित शाह ने कल 1985 के बाद हुए सभी प्रधानमंत्रियों में एनआरसी को लागू करने की हिम्मत न होने की बात की थी जो सर्वथा गलत है। जावड़ेकर ने कहा कि आनंद शर्मा का आरोप बिल्कुल गलत और तथ्य से परे और दुर्भावना से ग्रस्त था क्योंकि अमित शाह ने ऐसा तो कुछ कहा ही नहीं था।

उन्होंने कहा कि शाह ने तो कल राज्य सभा में दिए गए अपने वक्तव्य में कहा था कि 14 अगस्त 1985 को स्वर्गीय राजीव गांधी ने असम एकॉर्ड साइन किया।  15 अगस्त के भाषण में लाल किले से इसको डिक्लेयर किया। असम एकॉर्ड की आत्मा क्या थी? असम एकॉर्ड की आत्मा ही ‘एनआरसी’ थी और एनआरसी का मतलब क्या है? एकॉर्ड में क्या कहा गया? एकॉर्ड में यह कहा गया कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उसको हमारे सिटिजन रजिस्टर से अलग किया जाएगा। 

 

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 शाह ने आगे कहा कि एक शुद्ध नेशनल सिटिजन रजिस्टर बनाना है, यही “एनआरसी” का मतलब था।  हम ये एक इनिशिएटिव ले रहे हैं जो कांग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्री का लिया हुआ इनिशिएटिव था लेकिन इसको अमल करने की हिम्मत आपमें नहीं थी, हममें हिम्मत है। जावड़ेकर ने कहा कि इसमें अमित शाह जी ने तो ऐसा कुछ कहा ही नहीं कि असम एकॉर्ड को लागू करने की हिम्मत 1985 के बाद के किसी भी प्रधानमंत्री में नहीं था।  उन्होंने कहा कि जब अमित शाह जी का यह बयान रिकॉर्ड में मौजूद था, आनंद शर्मा जी को भी मालूम था कि उनका व्यवधान अनुचित है, फिर भी जानबूझ कर कांग्रेस पार्टी ने सदन में व्यवधान उत्पन्न किया।  


इतना ही नहीं, तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य ने सवाल उठाया कि एक सदस्य दो बार नहीं बोल सकते तो आदरणीय सभापति जी ने कहा कि कल उनका वक्तव्य पूरा नहीं हुआ था, इसलिए उन्हें बोलने की अनुमत दी गई है। इसके बाद फिर कांग्रेस एवं तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने जानबूझ कर सदन की कार्यवाही को बाधित करने की नापाक हरकत की, हम इसकी कड़ी भर्त्सना करते हैं। 

 

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जावड़ेकर ने कहा कि सदन में बिना किसी कारण के हंगामा करना, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह  को बोलने नहीं देना और माननीय गृहमंत्री जी को नहीं सुनना, कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस पहले ही तय करके आई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस, दोनों पार्टियां सदन को नहीं चलने देना चाहती थी क्योंकि वे सच सुनना ही नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि कल अलग-अलग पार्टियों के कम-से-कम 20 सदस्यों को हमने पूरी शांति और गंभीरता के साथ सुना लेकिन जब भारतीय जनता पार्टी के बोलने की बारी आई तो कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने अनुचित व्यवधान पैदा क्या और यही लोकतंत्र की हत्या है।  

 

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