दसाल्ट को उपयोगी नहीं लगी एचएएल : विदेश राज्य मंत्री

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राफेल विमान डील पर वीके सिंह ने रखा केंद्र सरकार का पक्ष

कहा, दो सरकारों के बीच करार पर भागीदारों का चयन नहीं करती सरकारें

 

दुबई। राफेल मुद्दे को लेकर केंद्र व पीएम मोदी पर कांग्रेस लगातार हमले बोल रही है। कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि दो सरकारों के बीच होने वाले सौदे पर भागीदार कंपनियों का चयन सरकारें नहीं करती। उन्होंने कहा कि इसका चयन उपकरण बनाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी होती है।

 

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दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास में शनिवार शाम को भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि यदि फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन को भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की वैमानिकी कंपनी हिदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ‘उपयोगी’ नजर नहीं आई तो इसको लेकर होहल्ला करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो बात उठ रही है वह यह कि एचएएल को क्या हुआ। यदि मैं व्यंग के लहजे में कहूं तो दसॉल्ट को एचएएल उपयोगी नहीं लगती है, तो हमें हल्ला नहीं करना चाहिए।

वीके सिंह ने कहा कि उपकरण बनाने वाली कंपनी यह तय करती कि आफसेट किसे देना है। ऐसे में यह फैसला दसॉल्ट का था। कई चीजों के लिए उन्होंने विभिन्न कंपनियों का चयन किया। अनिल अंबानी उनमें से एक हैं। केंद्रीय मंत्री सिंह ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि एचएएल के ऊपर पहले की काफी काम का बोझ है और उसे कई चीजें करनी हैं। हो सकता है कि दसॉल्ट ने उनके साथ बातचीत की हो। कहा जा रहा है कि एचएएल के साथ बातचीत 95 प्रतिशत पूरी हो गई थी। ऐसे में पांच प्रतिशत का क्या हुआ। कैसे यह वार्ता टूट गई।

 

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उन्होंने दावा किया कि मूल कीमत तथा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा 126 विमानों के लिए जिस कीमत को लेकर बातचीत की गई थी तथा उड़ान की स्थिति में विमान की मूल कीमत जो बैठेगी उसे देखा जाए तो मौजूदा सरकार ने 40 प्रतिशत कम में सौदा किया है। उन्होंने कहा कि जब संबंधित उपकरण की बात आती है तो गोपनीयता प्रावधान लागू होता है। वैमानिकी, रडार, हथियार प्रणाली और हथियार आपूर्ति प्लेटफार्म के प्रकार आदि का यदि खुलासा कर दिया जाएगा तो दुश्मन जान जाएगा कि उसमें क्या किया गया है। इस वजह से इसे गोपनीय रखा जाता है।   

 


 

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