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जानिए, कौन थे गंगा के लिए 114 दिन आमरण अनशन करने वाले स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद

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भारत के समाचार/National News


देहरादून। गंगा सफाई अभियान को लेकर आजीवन संघर्ष करने वाले ज्ञान स्वरूपसानंद भले ही आज नहीं रहे। लेकिन उनकी ख्याति आज पूरे देश में चर्चा का कारण बन गई है। गंगा के लिए आमरण अनशन करने को लेकर वह चर्चा में आए। उन्होंने गंगा को अविरल बनाए रखने के लिए खुद ही एक ड्राफ्ट तैयार किया था। इसी ड्राफ्ट को लागू कराने की स्वामी मांग कर रहे थे।

 

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स्वामी सानंद के बारे में

 

- स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का जन्म 20 जुलाई 1932 में हुआ था। 

- स्वामी सानंद का नाम देश के  प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमियों के नाम से भी पहचाना जाता है। स्वामी को जी डी अग्रवाल के नाम से भी जानते हैं। यही उनका मूल नाम है। 

- स्वामी महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक भी रहे। 

- 2009 में भागीरथी नदी पर बांध का निर्माण रुकवाने के लिए उन्होंने संघर्ष शुरू किया था। उन्होंने बांध निर्माण रुकवाने के लिए अनशन की शुरुआत भी की ​थी, जो सफल रहा था। 

- स्वामी आई आई टी, कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में प्राध्यापक के साथ ही केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार के पद को भी सुशोभित किया।


विशेष एक्ट की मांग

 

बताते चलें कि गंगा की निर्मलता और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए स्वामी सानंद केन्द्र सरकार से विशेष एक्ट पास कराने की मांग पर अड़े हुए थे। अनशन के दौरान लंबे समय से अन्न जल त्याग देने के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई थी। जिसके बाद उनको उपचार के लिए प्रशासन ने जबरन एम्स  ऋषिकेश में एडमिट करा दिया था। यहां इलाज के दौरान स्वामी सानंद का निधन हो गया। 


वार्ता हुई थी विफल

 

आपको बता दें कि स्वामी ने सांसद रमेश पोखरियाल से वार्ता की थी। लेकिन यह वार्ता सफल नहीं रही। इसके बाद उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया। अनशन तुड़वाने की कोशिश में प्रशासनिक उच्च अधिकारी उनके आश्रम पहुंचे और धारा 144 लगाने की बात कही। अधिकारियों की इस बात पर स्वामी को गुस्सा आ गया और कहा कि यह कैसा नियम है। नियमों के विपरीत कौन काम करता है। इसके बाद स्वामी शिवानंद से अनुमति लेकर सानंद को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। 

 

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तैयार किया था ड्राफ्ट

 

स्वामी ने गंगा की स्वच्छता के लिए अपनी ओर से ड्राफ्ट तैयार किया था। साथ ही इसी ड्राफ्ट के आधार पर विशेष एक्ट बनाने के लिए केन्द्र सरकार को 9 अक्टूबर तक का समय दिया था। लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर वह अन्न जल त्यागकर अनशन पर बैठ गए। बताते चलें कि इसके पहले भी कई बार स्वामी को एम्स में भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने अपना अनशन नहीं तोड़ा।

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