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घटता जलस्तर बना शामली के लोगों की चिंता का कारण

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कुंओं के बंद होने व तालाबों पर हुए कब्जें बने जलस्तर घटने का कारण

168.541 हैक्टेयर तालाबों की भूमि पर हां चुका है अवैध कब्जा

 

 

शामली। जिले में भूमिगत जल स्तर का लगातार गिरना आने वाले समय में पेयजल संकट की दस्तक दे रहा है। डार्क जोन में पहुंच चुका शामली का जल स्तर इसी प्रकार गिरता रहा तो आने वाले वर्षों में शामली के लोग पेयजल के साथ-साथ खेतों की सिंचाई के लिए पानी को तरस जाएंगे I लगातार गिर रहे जलस्तर का कारण है कि आज जनपद शामली के अधिकतर कुएं बंद हो चुके है और तालाबों पर अवैध कब्जें कर उन पर इमारतें बनाई जा चुकी है। जिसके चलते जनपद शामली डार्क जोन में घोषित किया जा चुका है।

 

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भूमिगत जल स्तर के लगातार घटने का एक बड़ा कारण अवैध भूजल दोहन, पानी के प्राचीन स्रोतों का बंद होना, गांवों में तालाबों पर अवैध कब्जा कर इमारतें बना लेना है। इसके अलावा एक मुख्य कारण क्षेत्र के किसानों में जागरूकता का अभाव होना भी है। करीब 15 वर्ष पहले तक 45 से 50 फीट पर पानी निकल आता था लेकिन अब यह 80 फीट पर पहुंच गया है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में भूमिगत जल स्तर लगभग 10 मीटर घट चुका है। यही हालात पड़ोसी जनपदों का भी है।

 

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  प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जनपद की कैराना तहसील में 1309 कुएं वह तालाब दर्ज हैं जिनका क्षेत्रफल 1031.077 हेक्टेयर है। शामली तहसील में 935 कुएं वह तालाब दर्ज हैं जिनका क्षेत्रफल 403.106 हेक्टेयर दर्ज हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार ही कैराना तहसील में 79.741 हेक्टेयर तालाब में कुओं की भूमि पर 2168 लोगों का कब्जा है और शामली तहसील में 88.8 हेक्टेयर कुंओं व तालाबों की भूमि पर 3638 लोगों का कब्जा है। हालांकि प्रशासन द्वारा पिछले दिनों चलाए गए अभियान में कैराना तहसील में 128 कब्जाधारकों से 14. 178 हेक्टेयर भूमि व शामली तहसील में 132 कब्जाधारकों से 11.181 हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई गई है। ताकि घटते जल स्तर को रोकने के लिए एस भूमि पर दोबारा तालाब खुदवाए जा सके।

 

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जलस्तर घटने के कारण

पिछले कुछ वर्षों में जिले के किसानों ने अधिकतर गन्ना और धान की फसल को अपना हुआ है। धान व गन्ने की फसल को अधिक सिंचाई की जरूरत होती है। औसतन बारिश कम होने तथा रजवाहों में नहरों में पानी कम आने से किसान ट्यूबवेल से सिंचाई करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिले में काफी लघु उद्योग भी लग चुके हैं, जो पानी का भारी मात्रा में दोहन करते हैं।

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