सरकारी लाभ के हकदार हो यौन पीड़ित बच्चे

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भारत के समाचार/ NATIONAL NEWS

 

नई दिल्ली। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बलात्कार पीड़ितों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं में यौन उत्पीड़न के शिकार हुए बच्चों को भी शामिल किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और दीपक गुप्ता की एक खंडपीठ ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित महिला पीड़ितों/ /यौन उत्पीड़ितों/ अन्य अपराध-2018 के लिए मुआवजा योजना में बाल पीड़ित शामिल हों।

 

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वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, जिन्होंने बलात्कार पीड़ितों के लिए समान मुआवजे के मामले में अपनी विशेष सेवाएं प्रदान की है और  निर्भया के बारे में चिंता व्यक्त की, ने कहा कि यह योजना न्यायालयी कार्रवाई के दौरान यौन अपराधों और एसिड हमलों के पीड़ितों के लिए वित्तीय समाधान का स्त्रोत होनी चाहिए। सुश्री जयसिंह दो हफ्तों में इस योजना के तहत बच्चों को शामिल करने के न्यायलय के सुझाव पर एक समग्र नोट दाखिल करने पर सहमत हुईं। उन्होंने कहा कि वह भारतीय दंड संहिता की धारा 228-A से संबंधित पहलू को भी संबोधित करेंगी, जो यौन अपराध पीड़ितों की पहचान के प्रकटीकरण से संबंधित है।

 

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यह योजना देश के किसी भी हिस्से में सामूहिक बलात्कार के पीड़ितों के लिए 5 लाख रुपए के एक समान भुगतान से लेकर अधिकतम 10 लाख रुपए तक का प्रस्ताव करती है। इसी तरह, बलात्कार और अप्राकृतिक यौन हमलों के मामले में पीडित को न्यूनतम 4 लाख रुपए और अधिकतम 7 लाख रुपए प्राप्त होंगे।  

 

 

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