इंटनेट की आजादी बनी रहेगा... नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों को मिली मंजूरी

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भारत का समाचार/ NATIONAL NEWS

 

नई दिल्ली। हाल ही में सरकार ने भारत में निर्बाध तथा मुफ्त इंटनेट सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाते हुए नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन करने या इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में किसी भी तरह के भेदभाव के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।

इसका तात्पर्य यह है कि कोई भी मोबाइल ऑपरेटर, इंटरनेट सेवा प्रदाता या सोशल मीडिया कंपनी सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर इंटरनेट की स्पीड से संबंधित मामले में किसी पसंदीदा वेबसाइट को महत्व नहीं दे पाएंगी। कंपनियां किसी भी सामग्री को ब्लॉक करने, धीमा या अधिमान्य गति प्रदान करने जैसे कार्य नहीं कर पाएंगी। बता दें कि यह फैसला मोबाइल ऑपरेटरों, इंटरनेट प्रोवाइजर्स, सोशल मीडिया कंपनियों सब पर लागू होगा।

 

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दूरसंचार आयोग( दूरसंचार विभाग में उच्चतम निर्णय लेने वाला निकाय) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा आठ माह पहले सुझाए गए नेट न्यूट्रैलिटी नियमों को मंजूरी दी है। कुछ उभरती और महत्वपूर्ण सेवाओं को इन मापदंडों के दायरे से बाहर रखा जाएगा। आयोग ने नई दूरसंचार नीति के नाम से चर्चित राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018 को भी मंजूरी दे दी है।

इन महत्वपूर्ण सेवाओं की जांच करने के लिए दूरसंचार विभाग के तहत एक अलग समिति की स्थापना की गई है। इनमें स्वायत्त वाहन, डिजिटल हेल्थकेयर सेवाएं या आपदा प्रबंधन आदि शामिल हो सकते हैं।

 

आखिर क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?

यह शब्द कोलंबिया विश्विद्यालय के प्राध्यापक टिम वू द्वारा 2003 में प्रथम बार उपयोग किया गया था। नेट न्यूट्रैलिटी वो सिद्धांत है जिसके तहत माना जाता है कि इंटनेट सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां इंटरनेट पर हर तरह के डाटा को एक जैसा दर्जा देंगी।

 

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इंटरनेट सर्विस प्रदान करने वाली इन कंपनियों में टेलीकॉम ऑपरेटर्स भी शामिल हैं। इन कंपनियों को डाटा के लिए अलग-अलग कीमतें नहीं लेनी चाहिए चाहे वह डाटा भिन्न वेबसाइटों पर विजिट करने के लिए हो या फिर अन्य सेवाओं के लिए।

 

 

 

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