जाति अव्यवस्था है, इसे खत्म करने के प्रयास होने चाहिए : मोहन भागवत

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संघ के त्रिदिवसीय व्याख्यानमाल के अंतिम दिन संघ प्रमुख ने दिए सवालों के जवाब

आरक्षण समस्या नहीं बल्कि आरक्षण पर राजनीति है समस्या

कहा-कानून बनाने से ही नहीं होगी गौरक्षा, पहले गाय पालें


नई दिल्ली। विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय व्याख्यान माला का समापन हो गया। व्याख्यानमाला के अंतिम दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की विचारधार से संबंधित पूछे गए सवालों के जवाब दिए। पिछले दो दिन की तरह अंतिम दिन भी भागवत ने विभिन्न पहलुओं पर अपनी बेबाक राय भी प्रस्तुत की। इस दौरान भागवत से जाति से संबंधित पूछ गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि जाति अव्यवस्था है। इसे भगाने का प्रयास करना चाहिए।

 

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इस दौरान भागवत से जाति से संबंधित पूछ गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि जाति अव्यवस्था है। इसे भगाने का प्रयास करना चाहिए। कहा कि एक बड़ी लाइन खींचो। सामाजिक विषमता की हर बात लॉक स्टॉक बैरल कर देनी चाहिए। हम संघ में जाति पूछते नहीं हैं। सहज प्रक्रिया से सबको लाएंगे। कहा कि 50 के संघ में ब्राह्मण ही नज़र आते थे। अब जोन स्तर पर सब जाति के आते हैं। हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आरक्षण से संबंधित एक प्रश्न पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि देश में आरक्षण समस्या नहीं है बल्कि आरक्षण पर राजनीति समस्या है। कहा कि आर्थिक आधार पर सामाजिक विषमता को हटा कर सबको बराबर का अधिकार संविधान में दिया गया है। संघ इसके पक्ष में है। जिन्हें दिया गया वे तय करेंगे कि उन्हें कब तक नहीं चाहिए। किसे मिले इस पर संविधान पीठ विचार कर रही है।

गौरक्षा के सवाल पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि केवल गायों के मुद्दे पर ही क्‍यों, किसी भी मामले पर कानून हाथ में लेना गलत है, गुनाह है। इसके लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन गाय एक आस्‍ता का मुद्दा है। गौरक्षा तो होनी चाहिए। संविधान का भी मार्गदर्शक तत्‍व है तो उसका पालन करना चाहिए। लेकिन ये गौरक्षा केवल कानून से नहीं होती है। गौरक्षा करने वाले देश के नागरिक गाय को पहले पालें। गाय को खुला छोड़ देंगे तो उपद्रव होगा, तो गौरक्षा के बारे में आस्‍था पर प्रश्‍न लगता है। कई लोग इस पर काम कर रहे हैं कि कैसे तकनीक के जरिए गायों के उपयोग को सभी के प्रतिदिन के जीवन में शामिल किया जाए।

 

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एससी/एसटी एक्ट पर हो रहे आंदोलन पर उन्होंने ​कहा कि स्वाभाविक पिछड़ेपन के कारण और जाति के अहंकार के कारण अत्याचार की स्थिति है। वो ठीक से लागू हो। उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. सामाजिक समरसता की भावना काम करनी चाहिए। समलैंगिकता पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि हर व्यक्ति समाज का अंग है। वो समाज के अंदर हैं। उनकी व्यवस्था का काम समाज को करना चाहिए।

समय बहुत बदला है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज अंग्रेजी का प्रभुत्व हमारे मन में हो चुका है। हम अपनी मातृभाषा को सम्मान देना शुरू करें। किसी भाषा से शत्रुता करने की ज़रूरत नहीं है। अंग्रेज़ी हटाओ नहीं, उसको उसकी जगह पर रखो। हमारी मातृभाषाओं में शिक्षा हो। एक अन्य भारतीय भाषा हम सीखें। यह मन बनाने से होगा, थोपने से नहीं होगा।

संघ का अल्पसंख्यकों के प्रति दृष्टिकोण के सवाल पर उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा स्पष्ट नहीं है। दूरियां बढ़ी हैं। अपने समाज के जो बंधु बिखर गए उन्हें जोड़ना है। हम एक देश की संतान हैं। मुस्लिम समाज के बारे में भय के बारे में मैंने कल बात की। संघ में आइए। जहां शाखा के बग़ल में मुस्लिम बस्ती हैं इन्हें अधिक सुरक्षा महसूस होती है। बिना कारण भय क्यों करना? आइए और देखिए।

 

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कश्मीर में धारा 370 के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि धारा 370 और 35ए नहीं रहने चाहिए। समान नागरिक संहिता संविधान के दिशा निर्देश तत्वों में है। किसी एक संहिता के लिए होना चाहिए।

 

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