अब सबरीमाला मंदिर जा सकेंगी सभी महिलाएं

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सुप्रीम कोर्ट का एक और ऐतिहासिक फैसला

 

नई दिल्ली। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को रोकना असंवैधानिक है। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को लेकर मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने कहा, 'हमारी संस्कृति में महिलाओं का स्थान आदरणीय है। दोतरफा नियम से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचती है।'

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 53 साल पुरानी परंपरा तोड़ कर ऐतिहासिक फैसला दिया। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को मंदिर जाने से नहीं रोक सकते, पुरूषों के बराबर महिलाओं को भी अधिकार। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब हर उम्र की महिलाएं सबरीमाला जा पाएंगी। पांच जजों की बेंच में पांच में से चार जजों ने महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया। जस्टिस इंदु मल्होत्रा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने के खिलाफ रही।

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सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में दायर एक याचिका पर यह फैसला सुनाया है। मंदिर में इस आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर इसलिए रोक लगाई गई है कि इस उम्र की महिलाओं को पीरियड्स आते हैं। मंदिर प्रशासन का तर्क है कि भगवान अयप्पा, जिनका यह मंदिर है, वो 'अविवाहित' थे। प्रतिबंध का समर्थन करने वाले भी तर्क देते हैं कि यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है।

वे ये भी तर्क देते हैं कि श्रद्धालुओं को मंदिर में आने के लिए कम से कम 41 दिनों तक व्रत रखना ज़रूरी होता है और शारीरिक कारणों से वे महिलाएं ऐसा नहीं कर सकतीं, जिन्हें पीरियड्स आते हैं। इस साल जुलाई में हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस परंपरा से भारत के संविधान में दी गई समानता की गारंटी का उल्लंघन होता है।

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