कुछ घंटों में ईद का हो सकता है ऐलान, ऐसे करें विश...

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नई दिल्ली।पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना से पंजाब के शाही इमाम व रूअते हिलाल कमेटी पंजाब (चांद देखने वाली कमेटी) के अध्यक्ष मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने पंजाब भर के मुसलमानों से अपील की है कि आज 14 जून को हर मुसलमान ईद-उल-फितर का चांद जरूर देखे शाही इमाम ने कहा कि अगर किसी भी मुसलमान को ईद-उल-फितर का चांद नजर आ जाता है तो वह तुरन्त जामा मस्जिद लुधियाना के इस फोन नं. 0161-2722282 पर सम्पर्क करें ताकि रमजान के पवित्र महीने का ऐलान किया जा सके।

 

 

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अगर 14 जून को ईद-उल-फितर का चांद नजर आ जाता है तो 15 जून दिन शुक्रवार को ईद-उल-फितर का पवित्र त्यौहार मनाया जायेगा। अगर 14 जून को चांद नजर नहीं आता है तो 16 जून दिन शनिवार को ईद-उल-फितर का पवित्र त्यौहार मनाया जायेगा।वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर के डाटा की मानें तो भारत में नया चांद 14 जून रात 1:13 पर निकलेगा, यानि 14 जून की शाम चांद स्पष्ट दिख सकता है। वहीं सऊदी अरब में 13 की रात 10:43 पर ही नया चांद निकल जाएगा। जिससे यह चांद सऊदी अरब में भी 14 जून को स्पष्ट दिख सकता है।

 

                                                                                                                                  

शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने बताया कि रमजान का महीना बड़ी बरकत व रहमत वाला महीना है। क्योंकि अल्लाह पाक फरमाते हैं कि रमजान का महीना मेरा महीना और मैं इस महीने में अपने हर बंदे के लिए रहमत का दरवाजा खोल देता हूं।उन्होंने बताया कि इसी पवित्र महीने अल्लाह तआला ने कुरआन शरीफ को भी दुनिया में उतारा। उन्होंने बताया कि रोजा रखने का मतलब भूखा-प्यासा रहना नहीं बल्कि अपने आप को सभी तरह की बुराईयों से रोकना है।

 

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रोजा रखने के बाद मुसलमान को बुरी बातों की तरफ जाना तो दूर उनके बारे में सोचना भी गुनाह है। दूसरों के बारे में बुरा सोच कर, झूठ या तकलीफ पहुंचाने वाली बात कहकर पीठ पीछे बुराई करके रोजे नहीं रखे जा सकते। उन्होंने कहा कि रोजा तमाम बुराईयों को खत्म करने की जड़ है।

 

 

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शाही इमाम ने बताया कि इस महीने में हर मुसलमान को चाहिए कि वह रोजा रख कर ज्यादा से ज्यादा कुरआन पढ़ें, अच्छे काम करें, गरीबों की सहायता करें और किसी को तकलीफ न पहुंचायें। शाही इमाम ने बताया कि आम दिनों में मुसलमान 5 नमाजें पढ़ता है, मगर रमजान के पवित्र महीने में 6 नमाजें अदा की जाती हैं। छठी नमाज को नमाजे तरावीह कहते हैं, जिसके बारे में है कि जिस व्यक्ति ने सारा दिन रोजा रखा और रात को तरावीह की नमाज अदा न की तो उसका रोजा पूरा नहीं होता।

उन्होंने बताया कि एक मुसलमान अपने खुदा के हुक्म से सुबह सेहरी से लेकर शाम इफ्तार के वक्त तक भूखा-प्यासा रहते हुए अपने खुदा की इबादत करते हुए अल्लाह के हर हुक्म को मानता है और कोशिश करता है कि इस पवित्र महीने में जितने ज्यादा से ज्यादा अच्छे काम हों, वह उसको करता है। शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने इस पवित्र महीने के मौके पर समूह पंजाब वासियों को व मुसलमानों को दिली मुबारकबाद देते हुए कहा कि मैं दुआ करता हूं कि यह महीना सबके लिए रहमतों वाला महीना हो।

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