कूड़े के ढेर को कौन करेगा साफ LG या सीएम ?.... सुप्रीम कोर्ट

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दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इन दिनों LG और सीएम केजरीवाल की सरकार के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा है। जिसके चलते कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए व्यवस्था दी थी। उपराज्यपाल के पास फैसले करने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है और वह निर्वाचित सरकार की मदद एवं सलाह से काम करने के लिए बाध्य हैं।

 

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न्यायमूर्ति एम बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल पिंकी आनंद और दिल्ली सरकार के वकील से पूछा कि भलस्वा, ओखला और गाजीपुर में कूड़े के पहाड़ है। जिसकी वजह से राजधानी के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आखिर कूड़ा प्रबंधन किसके क्षेत्राधिकार में आता और इस साफ करने की जिम्मेदारी किसकी है।

पिंकी आनंद ने कहा कि वह बुधवार को इस मुद्दे पर हलफनामा दायर करेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली कूड़े के ढेर में दब रही है। और मुंबई पानी में डूब रही है लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है। उन्होंने ठोस कचरा प्रबंधन रणनीति पर अपनी नीतियों पर हलफनामा दायर नहीं करने पर दस राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों पर जुर्माना भी लगाया है।

 

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ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने अफसोस जताते हुए कहा है कि जब अदालतें हस्तक्षेप करती हैं तो न्यायाधीशों पर न्यायिक सक्रियता के नाम पर निशाना साधा जाता है। उन्होंने कहा कि जब सरकार कुछ नहीं करती है या गैरजिम्मेदार तरीके से काम करती है तो क्या किया जा सकता है।

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