क्या मोदी लहर को रोक पायेगी विपक्षी ताकत, कर्नाटक से संदेश देने की कोशिश

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India news / भारत के समाचार


कुमारस्वामी सीएम और जी परमेश्वरम ने डिप्टी सीएम की ली शपथ


बेंगलुरु। कर्नाटक के नये मुख्यमंत्री के रूप में बुधवार को एचडी कुमारस्वामी ने पद और गो​पनियता की शपथ ली, वहीं उपमुख्यमंत्री पद के लिये कांग्रेस विधायक जी परमेश्वरम ने भी शपथ ली। दोनों ही नेताओं को कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने शपथ दिलाई। कुमारस्वामी का यह शपथ ग्रहण समारोह कई मामलों में अलग रहा।

कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह मंच से मोदी विरोधी ताकतों ने एकजुटता दिखाने की भरसक कोशिश की। 2019 में बीजेपी की लहर को रोकने के लिए लामबंद हो रहे देश भर के गैरभाजपाई दलों के वरिष्ठ नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह का मंच साझा कर पूरे देश को एक संदेश देने की कोशिश की। संदेश इस बात का कि एकता के साथ अगर सारे विरोधी ताकतें जुट कर चुनाव लड़ तो मोदी के तिलस्म को भेदना कोई बड़ी चुनौती नहीं है।

इस बात का पहला परीक्षण उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनाव में देखने को मिला जब सियासत में एक—दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाली समाजवादी पार्टी और बीएसपी साथ आईं, परिणाम चौकाने वाला रहा। न केवल मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने सियासी गृह जनपद में मुंह की खानी पड़ी बल्कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को भी माया—अखिलेश की दोस्ती ने चारों खाने चित्त कर दिया। इस जीत के बाद सारे विरोधी दल अपनी ताकत को समझ कर अगले लोकसभा चुनाव के लिए नई राह की तलाश में जुटे हुए हैं।


इस रणनीति की दूसरी कड़ी कर्नाटक फतह से जोड़कर देखी जा रही है। ज​बकि  मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में इस साल होने वाले चुनाव में अगर विरोधी दलों की रणनीति इसी रास्ते पर एका के साथ आगे बढ़ती है तो बीजेपी के लिए अपनी सत्ता बचाना किसी बड़ी चुनौती से कम साबित नहीं होने वाला। और शायद यही वजह है कि जोड़-तोड़ से बेशक गोवा, मणिपुर, मेधालय में सरकार बनाने वाली बीजेपी के सामने न केवल कर्नाटक की नाकामयाबी बल्कि जीत का जश्न मनाने के लिए कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण मंच पर सोनिया, माया, ममता, देवगौड़ा, राहुल, अखिलेश, शरद और यशस्वी यादव सरीखे नेताओं की मौजूदगी आने वाले दिनों में राज्यों के लिए बीजेपी और आरएसएस को नई रणनीति बनाने पर विवश कर रही है।

यहां पहुंचे सभी नेताओं का एचडी देवगौड़ा स्वयं स्वागत करते दिखे। सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश और मायावती के पहुंचने की रही। सोनिया गांधी और राहुल भी मायावती से मिले और कुछ देर तक आपस में बातचीत भी की। इसका भी राजनीतिक गलियारे में निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। कुल मिलाकर आज कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण ने बीजेपी की ​नींद जरूर हराम कर दी है। आज के इस विपक्षी संदेश की काट के​ लिए मोदी-शाह की जोड़ी क्या कदम उठाती है जनता को अब इसका इंतजार है।  

 

 

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