माननीयों के लिए फास्टट्रैक कोर्ट गठन की देरी पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

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केंद्र द्वारा दायर हलफनामे पर भी जताई नाराजगी, 5 सितम्बर को होगी अगली सुनवाई


नई दिल्ली। सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए फास्टट्रैक कोर्ट में देरी पर केंद्र सरकार को लताड़ लगाई है। केंद्र द्वारा इस मामले में दायर हलफनामे पर भी नारजगी जाहिर की। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 5 सितंबर तक पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने आपसे पूरी जानकारी मांगी थी और आपने कागजों का टुकड़ा थमा दिया।

 

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दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि कितने सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उनकी स्थिति क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की क्या स्थिति है? वहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को ये बताया था कि कितने फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के इसी रवैये पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1 नवंबर 2017 से जो जानकारी मांगी जा रही है वो केंद्र सरकार नहीं दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि 12 मार्च का हलफनामा क्या कहता है?

 

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सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि अब तक 11 राज्यों में 12 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा चुका है। केंद्र ने बताया था कि दिल्ली में 2, जबकि तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा चुका है। यहां केवल सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई होगी। अगली सुनवाई 5 सितम्बर को होगी।

 

 

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