नंदुला रघुराम अंतर्राष्ट्रीय नाइट्रोजन पहल के अध्यक्ष चुने गए

Foto

भारत के समाचार/ NATIONAL NEWS

 

नई दिल्ली। हाल ही में भारतीय वैज्ञानिक-शिक्षाविद नंदुला रघुराम को अंतर्राष्ट्रीय नाइट्रोजन पहल (आईएनआई) का अध्यक्ष चुना गया है। उल्लेखनीय है कि रघुराम ऐसे पहले भारतीय और एशियाई हैं जिन्हें आईएनआई का अध्यक्ष चुना गया है। ये भारतीय नाइट्रोजन समूह के अध्यक्ष और पोषक प्रबंधन पर यूएनईपी वैश्विक साझेदारी की संचालन समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। औपचारिक रूप से रघुराम 1 जनवरी, 2019 को आईएनआई के अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे।

 

ये भी पढ़ें- केरल बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें केंद्र: राहुल गांधी

 

बता दें कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसे साल 2003 में पर्यावरण की समस्याओं पर वैज्ञानिक समिति (एससीओपीई) और इंटरनेशनल जियोस्फीयर-बायोस्फीयर प्रोग्राम (आईजीबीपी) द्वारा प्रायोजित किया गया था। आईएनआई एक संचालन समिति द्वारा समन्वयित की जाती है, जिसका नेतृत्व इसके अध्यक्ष द्वारा किया जाता है और 6 क्षेत्रीय केंद्र निदेशक अफ्रीका, यूरोप, लैटिन अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

ये भी पढ़ें- पीएम ने देखी केरल की आपदा, 500 करोड़ की मदद करेगा केंद्र

 

आईएनआई प्रत्येक तीन साल में एक सम्मेलन आयोजित करता है। दिसंबर 2016 में मेलबर्न में अंतिम आईएनआई सम्मेलन आयोजित किया गया था। अगला आईएनआई सम्मेलन साल 2020 में बर्लिन, जर्मनी में आयोजित किया जाएगा। अगर आईएनआई के मुख्य उद्देश्यों की बात करें तो टिकाऊ खाद्य उत्पादन में नाइट्रोजन की फायदेमंद भूमिका को अनुकूलित करना। खाद्य और ऊर्जा उत्पादन के दौरान मानव स्वास्थ्य पर नाइट्रोजन के नकारात्मक प्रभाव को कम करना, वर्तमान में इस कार्यक्रम का एक सतत भागीदार ‘फ्यूचर अर्थ’ (future earth) है। उल्लेखनीय है कि फ्यूचर अर्थ एक वैश्विक संस्थान है जो अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से वैश्विक परिवर्तनों में तेजी से स्थिरता लाने हेतु समर्पित है।

 

ये भी पढ़ें- पाक के नापाक इरादें: इस्लामाबाद में शपथ ग्रहण, सीमा पार फायरिंग

 

आपको बताते चलें कि नाइट्रोजन जीवन के लिए जरूरी पांच प्रमुख रासायनिक तत्वों में से एक है। जबकि नाइट्रोजन सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है किंतु यह 99 प्रतिशत से अधिक आण्विक नाइट्रोजन या N2 के रूप में होता है, जिसका उपयोग ज्यादातर जीवों द्वारा नहीं किया जा सकता है। अधिकांश जीवित जीव केवल प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन का उपयोग कर सकते हैं। प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन में अमोनिया, अमोनियम, नाइट्रोजन ऑक्साइड, नाइट्रिक एसिड, नाइट्रस ऑक्साइड और नाइट्रेट एवं यूरिया, अमाइन, प्रोटीन तथा न्यूक्लिक एसिड जैसे जैविक यौगिक शामिल हैं।

 

ये भी पढ़ें- 6 राज्यों में मूसलाधार बारिश की संभावना, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

 

दरअसल, प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन में अभूतपूर्व वृद्धि ने दुनिया भर में लोगों और पारिस्थितिक तंत्र पर बुरा असर डाला है। प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन के कारण निचले वायुमंडल में ओजोन की उच्च सांद्रता से तटीय पारिस्थितिक तंत्र का यूट्रोफिकेशन, वनों, मिट्टी और ताजे पानी की धाराओं तथा झीलों का अम्लीकरण और जैव विविधता को नुकसान होता है। इसके अलावा यह नाइट्रस ऑक्साइड के रूप में एक ग्रीनहाउस गैस, नाइट्रोजन ग्लोबल वॉर्मिंग और स्ट्रेटोस्फेरिक ओजोन रिक्तीकरण में भी योगदान देता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

leave a reply

भारत के समाचार

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी