चेतावनीः बूंद-बूंद पानी को तरसेगी देश की आधी आबादी...

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पानी की कमी से हर साल दो लाख लोगों की हो रही मौत


नई दिल्ली। अगर हम अब भी न चेते तो जीवन के लिए सबसे अहम जरूरतों में शामिल पानी भी न मिल सकेगा। 'जल ही जीवन है', 'जल बचायें-जीवन बचायें' ऐसी तमाम पक्तियां अक्सर सुनने-देखने को मिल जाती है। लेकिन हमने इन संदेशों को अपने जीवन में कितना चरित्रार्थ किया है इसकी हकीकत नीति आयोग की ताजा जल प्रबंधन इंडेक्स रिपोर्ट में साफ दिखती है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में 60 करोड़ लोग पानी की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं और साफ पानी न मिलने से हर साल 2 लाख लोगों की मौत हो रही है।

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रिपोर्ट के मुताबिक आगे यह समस्या और विकराल रूप लेने वाली है और पानी की वर्तमान आपूर्ति के मुकाबले 2030 तक आबादी को दोगुनी पानी की आपूर्ति की जरूरत होगी। जिसके चलते करोड़ों लोगों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा और इससे जीडीपी में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश, ​हरियाणा, झारखंड और बिहार के लिए साफ चेतावनी है। इन प्रदेशों में जल प्रबंधन व्यवस्था सबसे बदहाल है। इन प्रदेशों को इस मसले पर ज्यादा सावधानी बरतने के साथ ही बेहतर कदम उठाने की आवश्यकता है।

जल प्रबंधन में गुजरात का प्रदर्शन सबसे बेहतरीन बताया गया है और वह सूची में अव्वल है। सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की गुरुवार को जारी जल प्रबंधन इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक देश इतिहास के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा है। लाखों जिंदगियां और उनकी आजीविका खतरे में है। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के चेयरमैन राजीव कुमार द्वारा संयुक्त रूप से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक तकरीबन 75 फीसदी घरों में पीने का पानी मुहैया नहीं है । 84 फीसदी ग्रामीण घरों में पाइप से पानी नहीं पहुंचता और देश में 70 फीसदी पानी पीने लायक नहीं है।

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जल प्रबंधन रिपोर्ट में गुजरात को पहला स्थान मिला है, जिसके बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र का स्थान है। जबकि उत्तर पूर्वी राज्यों में त्रिपुरा टॉप पर रहा है, वहीं पिछले दो वर्षों में राजस्थान ने जल प्रबंधन में अच्छी प्रगति की है। गडकरी के मुताबिक यह सूचकांक उन राज्यों पर दबाव बनाने में मदद करेगा, जिन्होंने अपनी जल प्रबंधन तकनीकों को बेहतर बनाने के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, क्योंकि यह सीधे राज्यों में कृषि की समृद्धि से जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी एक बड़ी चेतावनी है कि वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत का 120वां स्थान है। वहीं नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि देश में पानी की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 70 साल में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हर साल इतनी बारिश होती है, बाढ़ आती है लेकिन हमने कभी सोचा ही नहीं कि कभी पानी की समस्या भी हो सकती है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि इस विषय को गंभीरता से लेना होगा। यदि हम अपने शहरों को केपटाउन नहीं बनाना चाहते तो अभी से जल प्रबंधन शुरू करना होगा। 

 

 

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