विमुक्त, खानाबदोश, अर्द्ध-खानाबदोश जनजातियों के लिए आयोग के गठन को मंजूरी

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भारत के समाचार/ NATIONAL NEWS

 

नई दिल्ली। नीति आयोग ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा गठित पैनल के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें विमुक्त (Denotified-DNT), अर्द्ध-खानाबदोश (Semi-nomadic-SNT) तथा खानाबदोश जनजातियों (Nomadic Tribes-NT) के लिए एक स्थायी कमीशन गठित करने की बात कही गई है। मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में नीति आयोग ने इन सर्वाधिक वंचित समुदायों के कई मुद्दों पर विचार के लिए एक कार्यकारी समूह गठित करने की भी पेशकश की है।

 

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इस साल मई में मंत्रालय ने नीति आयोग को लिखा था कि DNT, SNT और NT समुदायों को लेकर भिकु रामजी इदेट आयोग की रिपोर्ट पर अपना रुख स्पष्ट करें। जवाब में नीति आयोग ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए बने आयोग की तर्ज पर इन समुदायों के लिए भी स्थायी आयोग गठित करने की सिफारिश के साथ सहमति व्यक्त की है। जनवरी 2018 में सामाजिक न्याय मंत्रालय को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में इदेट आयोग ने कहा था कि इस तरह के स्थायी आयोग में इस समुदाय के एक प्रख्यात नेता के अलावा केंद्र सरकार का एक वरिष्ठ नौकरशाह, मानव विज्ञानी और समाजशास्त्री होना चाहिए।

मंत्रालय ने नीति आयोग को यह भी लिखा था कि क्या वह संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुसार इन समुदायों के विकास के लिए विजन 2030 तैयार करने हेतु एक कार्यकारी समूह स्थापित करेगा। थिंक टैंक का पत्र समुदाय के सदस्यों जिसमें 90 प्रतिशत या अधिक भूमिहीन हैं, के बच्चों के शिक्षण शुल्क को कम करने और विद्यालयों में इन समुदायों के बच्चों के प्रवेश में राहत देने एवं भूमि तथा आवास का आसान आवंटन किए जाने का समर्थन करता है।

 

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स्वतंत्रता के बाद स्थापित कई आयोगों द्वारा DNT, NT, SNT समुदायों को सबसे ज्यादा हाथिये पर खड़े लोगों के रूप में पहचाना गया है। जनगणना के आंकड़ों में इस समुदाय को लंबे समय तक शामिल नहीं किया गया है। 2008 की रेन्के आयोग की रिपोर्ट में इनकी जनसंख्या 10-12 करोड़ के बीच होने का अनुमान लगाया गया था लेकिन इस आयोग की किसी भी सिफारिश को लागू नहीं किया गया।

नीति आयोग ने DNT, SNT और NT के लिए समर्पित राष्ट्रीय वित्त विकास निगम बनाने हेतु पैनल के सुझाव का भी समर्थन किया है। बता दें कि DNT वे हैं जिन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा कानून के माध्यम से अपराधियों के रूप में दर्ज किया गया था और उन्हें आजादी के बाद विमुक्त जनजाति (DENOTIFIED TRIBES) के रूप में माना गया था।

 

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NT निरंतर भौगोलिक गतिशीलता बनाए रखती है, जबकि SNT वे लोग हैं जो गतिशील तो हैं लेकिन साल में कम-से-कम एक बार मुख्य रूप से व्यावसायिक कारणों से एक निश्चित आवास पर लौट आते हैं। यद्यपि मानव संसाधन विकास, वित्त, संस्कृति, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने मंत्रालयों से संबंधित सिफारिशें भेजी हैं, शेष मंत्रालयों को अभी जवाब देना बाकी है।

 

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पैनल की कुछ प्रमुख सिफारिशों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बाद एक अलग तीसरी अनुसूची के तहत इन समुदायों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करना, उन्हें आरक्षण के लिए पात्र बनाना और अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत इन समुदायों के लिए भी सुरक्षात्मक कवर को विस्तारित करना शामिल है।

 

 

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